कर्नाटक: कर्नाटक के आलंद निर्वाचन क्षेत्र में 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले कथित ‘वोट चोरी’ की जांच कर रही विशेष जांच दल (एसआईटी) ने बड़ा खुलासा किया है। जांच में सामने आया है कि मतदाता सूची से लोगों के नाम व्यवस्थित तरीके से हटाने का प्रयास किया गया था और इस काम में शामिल छह संदिग्धों पर शिकंजा कसा गया है।
प्रति नाम 80 रुपये का सौदा
अपराध जांच विभाग (सीआईडी) के शीर्ष सूत्रों ने बताया कि मतदाता सूची से प्रत्येक नाम सफलतापूर्वक हटाने के बदले आरोपियों को 80 रुपये दिए जाते थे। कुल 6,994 मतदाताओं के नाम हटाने के अनुरोध किए गए थे, जिनमें से कुछ वास्तविक मामलों को छोड़कर शेष सभी आवेदन फर्जी थे।
राहुल गांधी ने किया था खुलासा
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हाल में दिल्ली में संवाददाता सम्मेलन में आलंद का उदाहरण देते हुए देश में हो रही ‘वोट चोरी’ का खुलासा किया था। कलबुर्गी जिले में आने वाला यह विधानसभा क्षेत्र कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का गृहक्षेत्र है और कांग्रेस विधायक बी. आर. पाटिल यहां से जनप्रतिनिधि हैं।
पाटिल और खड़गे के बेटे प्रियंक खड़गे ने ही मतदाता सूची से नाम हटाने की कोशिशों का पर्दाफाश किया था और कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को इसकी जानकारी दी थी। पाटिल के अनुसार, दलितों और अल्पसंख्यकों सहित कांग्रेस समर्थक 6,994 मतदाताओं के नाम हटाने के लिए आवेदन दिए गए थे। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के यथास्थिति बनाए रखने के आदेश के बाद यह प्रक्रिया रोक दी गई।
पाटिल ने कहा कि अगर ये नाम हटा दिए जाते, तो वह निश्चित रूप से चुनाव हार जाते। उन्होंने 2023 का विधानसभा चुनाव अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी सुभाष गुट्टेदार (बीजेपी) से लगभग 10,000 मतों के अंतर से जीता था।
एसआईटी की जांच में बड़े खुलासे
मामले की गंभीरता को देखते हुए कर्नाटक सरकार ने विशेष जांच दल का गठन किया, जिसका नेतृत्व सीआईडी में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक बी. के. सिंह कर रहे हैं। सीआईडी के एक शीर्ष अधिकारी ने गुरुवार को बताया कि लगभग 30 लोगों से पूछताछ की गई है और उनमें से पांच-छह मुख्य संदिग्ध हैं, जिन्हें जल्द गिरफ्तार किया जा सकता है।
अधिकारी ने कहा कि ऐसी कोशिशें अन्य जगहों पर भी हुई हों, इसे नकारा नहीं जा सकता, लेकिन फिलहाल फोकस केवल आलंद क्षेत्र पर है। सीआईडी सूत्रों के अनुसार, छह संदिग्ध एक डेटा सेंटर से जुड़े थे और उन्होंने ‘वॉइस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल’ (वीओआईपी) तकनीक का इस्तेमाल करते हुए मतदाता सूची से नाम हटाने का काम अंजाम दिया।
बीजेपी नेताओं के ठिकानों पर छापे
जांच के दौरान एसआईटी ने संदिग्धों से जुड़े ठिकानों पर छापे मारे। बीजेपी नेता सुभाष गुट्टेदार, उनके बेटों हर्षानंद और संतोष गुट्टेदार तथा उनके चार्टर्ड अकाउंटेंट के ठिकानों पर भी छापेमारी की गई। एसआईटी को गुट्टेदार के घर के पास मतदाताओं के जले हुए रिकॉर्ड भी मिले हैं।
हालांकि, गुट्टेदार ने दावा किया कि दिवाली के दौरान उनके घर के सफाई कर्मचारियों ने कचरा जला दिया था। उन्होंने कहा कि इन दस्तावेजों को जलाने के पीछे कोई गलत मकसद नहीं था और अगर उनका कोई गलत इरादा होता, तो वे इन्हें घर से दूर कहीं जलाते।
मंत्री प्रियंक खड़गे की प्रतिक्रिया
नवीनतम खुलासे पर प्रतिक्रिया देते हुए, मंत्री प्रियंक खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि कर्नाटक एसआईटी के निष्कर्ष उनके दावों की पुष्टि करते हैं कि 2023 के चुनावों से पहले एक ‘पेड ऑपरेशन’ के माध्यम से 6,000 से अधिक वास्तविक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए।
मंत्री ने कहा कि कलबुर्गी में एक पूर्ण डेटा सेंटर संचालित हो रहा था, जहां संचालक व्यवस्थित तरीके से मतदाताओं के नाम हटा रहे थे और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ छेड़छाड़ कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सभी जांचें अब बीजेपी नेताओं और उनके सहयोगियों की गड़बड़ी की ओर इशारा कर रही हैं और जिम्मेदार हर व्यक्ति को जवाबदेह ठहराया जाएगा।
आलंद विधायक पाटिल ने कहा कि उन्हें एसआईटी की प्रगति के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं है और वह जांच के अंतिम नतीजे का इंतजार करेंगे।
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