नई दिल्ली: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पलवल (हरियाणा) के चर्चित मॉब लिंचिंग मामले में आरोपी नरबीर उर्फ नरवीर की जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। माननीय जस्टिस सूर्या प्रताप सिंह ने मामले की गंभीरता और उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए यह फैसला सुनाया।
मामले की पृष्ठभूमि
यह घटना 24 जनवरी 2025 की है, जब पलवल के औरंगाबाद गांव में कथित तौर पर दो गाय और एक बछड़ा ले जा रहे ट्रक चालक रवि और यूसुफ पर भीड़ ने हमला कर दिया था। इस हमले में यूसुफ की मौत हो गई थी, जबकि रवि गंभीर रूप से घायल हुआ था। इस मामले में थाना मुंडकटी में एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसमें वर्तमान में कुल 9 आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं।
अदालत में हुई बहस
बचाव पक्ष का तर्क: आरोपी के वकील ने दलील दी कि नरबीर का नाम मूल एफआईआर में नहीं था। हालांकि सीसीटीवी फुटेज में उसकी मौजूदगी है, लेकिन वह सीधे तौर पर हिंसा में शामिल नहीं दिख रहा।
विरोध में तर्क: जमीयत उलेमा-ए-हिंद की ओर से नियुक्त एडवोकेट रोज़ी ख़ान ने पीड़ितों (दिवंगत यूसुफ और चालक रवि) का पक्ष रखते हुए जमानत का कड़ा विरोध किया। उन्होंने साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की संलिप्तता को स्पष्ट किया।
अदालत का फैसला: हाईकोर्ट ने माना कि सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर प्रथम दृष्टया आरोपी की संलिप्तता दिखती है। अपराध की प्रकृति को अत्यंत गंभीर बताते हुए कोर्ट ने जमानत देने से इनकार कर दिया।
न्याय के लिए जमीयत की सक्रियता
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी के मार्गदर्शन में पीड़ितों को कानूनी सहायता प्रदान की जा रही है।
कानूनी टीम: पलवल जिला न्यायालय में एडवोकेट ईश्वर सिंह सोरेन पैरवी कर रहे हैं, जबकि हाईकोर्ट में एडवोकेट रोज़ी ख़ान मोर्चा संभाल रही हैं।
निगरानी: पूरी कानूनी रणनीति जमीयत के कानूनी मामलों के प्रभारी नियाज़ अहमद फारूकी की देखरेख में तैयार की जा रही है।
इससे पूर्व जमीयत के जनरल सेक्रेटरी मौलाना हकीमुद्दीन कासमी और हरियाणा इकाई के मौलाना यह्या करीमी ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर उन्हें न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया था। फिलहाल मामला जिला एवं सत्र न्यायालय पलवल में विचाराधीन है और गवाही की प्रक्रिया जारी है।
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