लखनऊ: मुस्लिम समुदाय की महिलाओं ने शनिवार को लखनऊ के विधान भवन के गेट नंबर 4 पर एक प्रदर्शन किया, जिसका नेतृत्व शायर मुनव्वर राणा की बेटी सुमैया राणा ने किया। इस प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य पैगंबर मोहम्मद साहब (स.अ.व) के समर्थन में अपनी भावनाएं व्यक्त करना था। प्रदर्शनकारियों के हाथों में ‘आई लव मोहम्मद’ लिखा हुआ था और उन्होंने पैगंबर मोहम्मद साहब (स.अ.व) के प्रति अपनी मोहब्बत और सम्मान जताने वाले नारे लगाए। यह प्रदर्शन कानपुर में हाल ही में हुई एक घटना के विरोध में किया गया था, जहां 12 रबी-उल-अव्वल के मौके पर ‘आई लव मोहम्मद’ का बोर्ड लगाने पर मुस्लिम समुदाय के लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था।
सुमैया राणा ने इस मौके पर कहा कि पैगंबर का नाम लिखने पर मुकदमा दर्ज करना भारत की धर्मनिरपेक्षता पर प्रश्नचिह्न लगाता है और इसे मुसलमानों को डराने की कोशिश के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा मुकदमा दर्ज कर जेल भेजना असंवैधानिक है और उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब है, जिसमें कानून का दंड एक विशेष समुदाय पर विशेष रूप से लागू किया जा रहा है। इस प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच जमकर झड़प भी हुई, जिसमें पुलिस ने कई महिलाओं को हिरासत में लेकर इको गार्डन प्रदर्शन स्थल भेज दिया।

सुमैया राणा ने विश्व की शीर्ष 10 महान हस्तियों की सूची में पैगंबर मोहम्मद साहब (स.अ.व) को प्रथम स्थान दिए जाने का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्हें शांति का संदेश फैलाने वाले नेता के रूप में जाना जाता है, लेकिन यहां पैगंबर का नाम लिखने पर मुकदमा दर्ज किया जा रहा है, जो दुखद और अनुचित है। प्रदर्शन में शामिल महिलाओं ने सरकार की इस रवैये की कड़ी निंदा की और कहा कि वे अपने धर्म और पैगंबर साहब के लिए हमेशा खड़ी रहेंगी और किसी भी तरह के उत्पीड़न को स्वीकार नहीं करेंगी।
यह प्रदर्शन मुस्लिम समुदाय की महिलाओं के एकता और आक्रोश का प्रतीक था, जो धर्मनिरपेक्षता और न्याय की मांग करते हुए अपने धार्मिक सम्मान की रक्षा के लिए सामने आईं। इस प्रकार का प्रदर्शन वर्तमान समय में सामाजिक और राजनीतिक संवेदनशीलता के मुद्दों को उजागर करता है, विशेषकर उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में, जहां कानून-व्यवस्था और सामाजिक सद्भावनाओं को लेकर बहस जारी है।
यह मुस्लिम महिलाओं का प्रदर्शन मुख्य रूप से कानपुर में हाल ही में हुई एक विवादित घटना के विरोध में किया गया है। उस घटना में 12 रबी-उल-अव्वल (पैगंबर मोहम्मद साहब (स.अ.व) के जन्मदिन) के मौके पर कुछ लोगों ने “आई लव मोहम्मद” लिखा हुआ बोर्ड लगाया था, जिसके बाद स्थानीय प्रशासन ने इस मामले में मुस्लिम समुदाय के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी की कार्रवाई की। इसे लेकर मुस्लिम समुदाय, खासकर महिलाएं, यह मानती हैं कि यह कार्रवाई उनके धार्मिक भावनाओं का अपमान और उनके अधिकारों का उल्लंघन है।
कानपुर में “आई लव मोहम्मद” पोस्टर विवाद और पुलिस द्वारा मुस्लिम युवाओं पर FIR दर्ज किए जाने के बाद यह वाकया सोशल मीडिया समेत पूरे भारत में बड़ी चर्चा का विषय बन गया। इस घटना ने पूरे देश के मुस्लिम समुदाय में गहरा आक्रोश भर दिया, जिसके कारण सोशल मीडिया पर #ILoveMuhammad जल्द ही ट्रेंड बन गया।
मुस्लिम समुदाय के लोग, खासकर युवाओं ने इस ट्रेंड के जरिए पैगंबर मोहम्मद साहब के प्रति अपने प्यार और सम्मान का खुलकर इजहार शुरू कर दिया। कई लोग अपने प्रोफाइल फोटो और पोस्टरों में ‘आई लव मोहम्मद’ लिखकर इसे समर्थन दे रहे हैं। इस मुहिम को AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी, उलेमा और विभिन्न मुस्लिम धार्मिक संस्थानों ने भी जोरदार समर्थन दिया। ओवैसी ने इस कार्रवाई को अनुचित बताया और कहा कि “आई लव मोहम्मद” कोई अपराध नहीं है, बल्कि एक धार्मिक भावना है।
देश के अलग-अलग राज्यों में प्रदर्शन और जुलूस निकाले गए, जहां लोगों ने इस FIR को वापस लेने और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा की मांग की। इस ट्रेंड ने सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर बड़े पैमाने पर बहस को जन्म दिया, साथ ही कई गैर-मुस्लिम समर्थक भी इस मुहिम के साथ जुड़े। एक सनातनी हिंदू लड़की का वीडियो भी वायरल हुआ, जिसमें उसने खुलेआम कहा कि वह सनातनी होते हुए भी “आई लव मोहम्मद” कहती है, जिससे इस ट्रेंड को और व्यापक समर्थन मिला।
इस प्रकार कानपुर की घटना ने पूरे भारत में यह ट्रेंड जन्म दिया, जो न केवल सोशल मीडिया की भाषा बन गया बल्कि सड़कों और अन्य सार्वजनिक मंचों पर भी विरोध और समर्थन के रूप में उभरा है। यह ट्रेंड धार्मिक स्वतंत्रता, समानता और सम्मान की मांग का प्रतीक बन गया है।
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