Opinion

इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और उर्दू पत्रकारिता-डॉ. मुज़फ़्फ़र हुसैन ग़ज़ाली

उर्दू पत्रकारिता के दो सौ साल पूरे हो रहे हैं। इस दौरान उसने कई उतार-चढ़ाव देखे। उसने गुलामी से मुक्ति आंदोलन देखा। उसने एक...

दुर्गम क्षेत्र में स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना एक अद्भुत पहल-डॉ. मुज़फ़्फ़र हुसैन ग़ज़ाली

आदिवासी इलाकों में मौत कहां से आ जाएगी इसका अंदाजा लगाना मुश्किल हैछत्तीसगढ़ के सुकमा जिले को ऊंची नीची जमीन, पहाड, जंगल और नदी...

दुनिया के लिए विनाशकारी 3 देशों की महत्वाकांक्षा-राठौर विचित्र मणि सिंह

मानव सभ्यता को बेहतर बनाने का एक ही फार्मूला है सह-अस्तित्व। यानी सबके वजूद को समान रूप से सम्मान देना। हर देश को बगैर...

क़िस्सों में सिमट गयी अवध की होली

होली के खुमार ने भारतीय संस्कृति में कई खूबसूरत अध्याय जोड़े हैं। ये खुमार जब अवध के नवाबों के सिर चढ़ा तो उन्होंने होली...

‘तू हाए गुल पुकार मैं चिल्लाऊँ हाए दिल’ हालिया इलेक्शन के नतीजे जम्हूरियत की रूह के ख़िलाफ़ हैं-कलीमुल हफ़ीज़

डॉक्टर की एक ग़लती इंसान को मौत के मुँह में धखेल देती है, जज की एक ग़लती फाँसी के तख़्ते पर पहुँचा देती है...

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