रामपुर में ‘आज़म युग’ का अंत? अखिलेश यादव ने बिछाई नई बिसात, पूर्व बसपाई दलित चेहरे पर लगाया दांव

Date:

रामपुर/लखनऊ | 10 मार्च, 2026: समाजवादी पार्टी के गढ़ रहे रामपुर की सियासत में एक बड़े बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रामपुर से बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के पूर्व नेता सुरेंद्र सिंह सागर को पार्टी का प्रदेश सचिव नियुक्त किया है। राजनीतिक हलकों में इसे आज़म खान के वर्चस्व वाले रामपुर में एक नया और वैकल्पिक नेतृत्व खड़ा करने की अखिलेश यादव की सोची-समझी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

आजम खान के गढ़ में नई ‘सोशल इंजीनियरिंग’

वरिष्ठ पत्रकार तमकीन फयाज़ के अनुसार, सुरेंद्र सागर को बड़ी जिम्मेदारी देना यह दर्शाता है कि अखिलेश यादव अब अपने PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले के तहत दलित चेहरों को आगे बढ़ाकर रामपुर की सोशल इंजीनियरिंग बदलना चाहते हैं।

सुरेंद्र सागर की पकड़: वे बसपा में जिला अध्यक्ष और दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री रह चुके हैं। दलित समाज, विशेषकर जाटव समुदाय में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है।

आजम खान बनाम नई रणनीति: लंबे समय से जेल में बंद आज़म खान और उनके परिवार के लिए कानूनी अड़चनों के कारण भविष्य में चुनाव लड़ना चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में अखिलेश यादव रामपुर को आज़म खान के भरोसे छोड़ने के बजाय एक नया ढांचा तैयार कर रहे हैं।

क्या साइडलाइन किए जा रहे हैं आज़म खान?

वीडियो चर्चा में यह बात प्रमुखता से उभरी कि पिछले कुछ समय से आज़म खान और सपा हाईकमान के बीच सब कुछ ठीक नहीं है:

टिकट बंटवारा: लोकसभा चुनाव में आज़म खान की मर्जी के बिना मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी को टिकट दिया गया, जिसका आज़म समर्थकों ने विरोध भी किया था।

संगठन पर कब्जा: रामपुर सपा में फिलहाल कोई आधिकारिक जिला अध्यक्ष नहीं है। सुरेंद्र सागर की नियुक्ति के बाद अब संगठन की कमान आज़म खान के करीबियों के बजाय नए हाथों में जाती दिख रही है।

कार्यालय का अभाव: रामपुर में सपा का अपना कार्यालय भी छिन चुका है। अब सुरेंद्र सागर के प्रदेश सचिव बनने के बाद उनके आवास पर कार्यकर्ताओं की बढ़ती भीड़ एक नए शक्ति केंद्र (Power Center) के उदय का संकेत दे रही है।

2027 की तैयारी: दलित-मुस्लिम-यादव गठजोड़

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि सुरेंद्र सागर के जरिए अखिलेश यादव शाहबाद जैसी आरक्षित सीटों और जिले के अन्य हिस्सों में दलित और यादव वोटों को एकजुट करना चाहते हैं। यदि आज़म खान के समर्थक और नया नेतृत्व एक साथ मिलकर काम करते हैं, तो सपा के लिए 2027 की राह आसान हो सकती है। हालांकि, आज़म खान के कट्टर समर्थकों के बीच सुरेंद्र सागर की स्वीकार्यता कितनी होगी, यह आने वाला वक्त ही बताएगा।

Share post:

Visual Stories

Popular

More like this
Related

‘Hum Aur Tum’: A Musical Journey Through Love, Longing and the Beautiful Shades of Life

Devanand Jha and Shweta Dubey mesmerise audiences with timeless...

इबरत का मुक़ाम: औलिया की चौखट और बादशाह का मक़बरा

दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में कदम रखते ही इतिहास,...

JMI Teaching, Non-Teaching Staff Condemn ‘Objectionable Slogans’; University Shifts Classes Online

New Delhi, October 24, 2026: Over 1,500 teaching and...