नई दिल्ली/जामिया नगर: हाल ही में दिल्ली हाई कोर्ट में जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय(Jamia Millia Islamia) की बेशकीमती जमीन को बेचने का मामला आया था, जिसके बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले से जुड़े सभी लोगों को नोटिस जारी किया और इस जमीन के ट्रांसफर पर रोक लगा दी।
जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली के शारीरिक शिक्षा शिक्षक (‘पीईटी’) और जामिया स्कूल टीचर्स एसोसिएशन (‘जेएसटीए’) के निवर्तमान सचिव हारिसुल हक ने माननीय दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था ताकि, माननीय न्यायालय के हस्तक्षेप से, विश्वविद्यालय के अधिकारियों को कुछ निजी पार्टियों को लाभ पहुंचाने के लिए अवैध रूप से मूल्यवान और प्रमुख भूमि, जिस पर विश्वविद्यालय के पास महत्वपूर्ण अधिकार हैं, को बेचने से रोका जा सके।
यह मामला 24.08.2023 को उच्च न्यायालय के समक्ष उठाया गया था। माननीय दिल्ली उच्च न्यायालय के एकल न्यायाधीश अर्थात माननीय श्री न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने विश्वविद्यालय, माननीय न्यायालय सहित सभी हितधारकों को सुनने के बाद हारिसुल हक द्वारा प्रस्तुत प्रस्तुतियों पर संज्ञान लिया और प्रथम दृष्टया राय दी कि इस मुद्दे पर विचार की वश्यकता है और इस प्रकार, माननीय न्यायालय ने विश्वविद्यालय के सभी नामांकित व्यक्तियों, शिक्षा मंत्रालय, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (`यूजीसी’), विजिटर (भारत के माननीय राष्ट्रपति) और अन्य को निर्देशित नोटिस जारी किया है।

नोटिस जारी करते समय, माननीय न्यायालय ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि विश्वविद्यालय और अन्य हितधारकों द्वारा यथास्थिति बनाए रखी जाएगी।
वास्तव में, यह उस भूमि को विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार को हस्तांतरित करने के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (‘एनओसी’) जारी करने के कार्यकारी परिषद के विवादित निर्णय को प्रभावी नहीं करेगा।
लेकिन अब इस मुद्दे पर जामिया मिल्लिया इस्लामिया के डीएसडब्ल्यू प्रो. इब्राहीम ने जामिया के कुलपति को दिनांक 3/9/2023 को एक पत्र लिखा है, जिसमें कहा गया है कि जमीन के समर्पण पर हस्ताक्षर करते समय, उन्हें पूरी स्थिति नहीं बताई गई और न ही मीटिंग में कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया। जिसके चलते उन्होंने अपनी एनओसी वापस ले ली। जब पत्रकार ने प्रो. जब इब्राहीम को फोन करके इस पत्र के बारे में पूछा गया तो उन्होंने इस पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।
इस मुद्दे पर एक प्रेस नोट जारी करते हुए जामिया ओल्ड बॉयज़ के अध्यक्ष श्री जावेद आलम खान ने कहा,”दिनांक 04.08.2023 को हुई कार्यकारी परिषद की बैठक में विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक ओर जहां 4 लीज धारकों के बैनामे निरस्त करने का निर्णय लिया वहीं दूसरी ओर श्रीमती ज़किया ज़हीर को 850 गज भूमि की एनओसी देने के विचार पर सहमति व्यक्त की। उन्हें इस पूरे प्रकरण में साजिश की बू आ रही है।
जामिया ओल्ड बॉयज एसोसिएशन (JOBA) ने वीसी मैडम प्रोफेसर नजमा अख्तर से मांग की है कि इस जमीन के मुद्दे पर यूनिवर्सिटी की ओर से एक नोटिफिकेशन जारी कर पूरी जामिया बिरादरी और खासकर एग्जीक्यूटिव काउंसिल के सदस्यों को स्थिति से अवगत कराया जाए। जामिया के प्रोफेसर को भूमि मामले में अपनी स्थिति के बारे में जामिया बिरादरी को भी सूचित करना चाहिए। अन्यथा जामिया बिरादरी उनके कृत्य को कभी माफ नहीं करेगी।
- Jamia’s RCA Shines: 38 Students Clear UPSC 2025 with 4 in Top 50

- ईरान-इजरायल युद्ध: ट्रम्प प्रशासन को लगा दोहरा झटका; बेन गुरियन एयरपोर्ट पर भीषण हमला और हथियारों की भारी कमी

- UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 के परिणाम घोषित: राजस्थान के डॉ. अनुज अग्निहोत्री ने किया देश में टॉप

- JIH President Condemns US-Israel Aggression on Iran, Warns Against Wider Gulf War

- ईरान का इज़राइल पर बड़ा मिसाइल हमला: तेल अवीव सहित मध्य इज़राइल में भारी विस्फोट, आपातकाल घोषित

- ईरान: मीनाब के प्राथमिक विद्यालय पर हमले में 168 छात्राओं की शहादत, अंतिम वीडियो जारी

