उत्तर प्रदेश: मदरसों में अवैध नियुक्तियों और वित्तीय धांधली के आरोपों के बीच उच्च स्तरीय जांच की मांग

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लखनऊ/मुरादाबाद: उत्तर प्रदेश के मदरसों में शिक्षकों एवं कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया, वित्तीय व्यवस्था और प्रबंधन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। ताज़ा मामले में मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (मदरसा एवं छात्र प्रकोष्ठ) ने राज्य के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर भर्ती प्रक्रिया में कथित अवैध नियुक्तियों और भ्रष्टाचार की उच्च स्तरीय जांच कराने का आग्रह किया है।

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के मोहम्मद मज़ाहिर खान द्वारा भेजे गए इस पत्र में आरोप लगाया गया है कि शासन स्तर से नियुक्तियों पर लगी रोक के बावजूद कई मदरसों में गुपचुप तरीके से भर्तियां की गई हैं। पत्र में यह भी दावा किया गया है कि मदरसा संचालकों द्वारा उम्मीदवारों से नियुक्तियों के नाम पर अवैध वसूली की जा रही है, जिससे योग्य अभ्यर्थियों को समान अवसर नहीं मिल पा रहे हैं।

पत्र के माध्यम से मांग की गई है कि जब तक भर्ती प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक सभी संदिग्ध नियुक्तियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए। इसके साथ ही भविष्य की सभी भर्तियों की जानकारी समाचार पत्रों और सरकारी ऑनलाइन पोर्टलों पर सार्वजनिक करने तथा दोषी पाए जाने वाले संचालकों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठाई गई है।

पहले से चल रही हैं कई बड़ी जांचें

उत्तर प्रदेश में मदरसों से जुड़ी अनियमितताओं की जांच का यह कोई पहला मामला नहीं है। राज्य में पहले से ही कई स्तरों पर जांच प्रक्रियाएं जारी हैं:

  • 558 अनुदानित मदरसों की जांच: राज्य पुलिस का भ्रष्टाचार निवारण संगठन लगभग 1,100 करोड़ रुपये के वार्षिक बजट वाले 558 अनुदानित मदरसों में नियमों के उल्लंघन, फर्जीवाड़े और संदिग्ध वेतन भुगतानों की जांच कर रहा है।
  • कागजों पर संचालित मदरसे: हाल ही में अमरोहा जिले में जांच के दौरान 210 मदरसों में से 25 ऐसे मदरसे पाए गए जो केवल कागजों पर दर्ज थे और मौके पर वीरान मिले।
  • विदेशी फंडिंग और एटीएस जांच: गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों में आय के स्रोतों और संदिग्ध विदेशी फंडिंग को लेकर एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) भी जांच कर रही है।
  • चंदे का ब्योरा: राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने अनुदानित मदरसों से पिछले पांच वर्षों में मिले चंदे, दान और विदेशी अंशदान (FCRA) का पूरा ब्योरा तलब किया है।

मदरसा प्रबंधन में पारदर्शिता और सुधार को लेकर उठ रही इन मांगों पर अब राज्य सरकार और संबंधित विभागों के अगले रुख पर नजर बनी हुई है।

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