मोहम्मद मज़ाहिर खान (रुहेला पठान): समाज सुधार और प्रखर राष्ट्रप्रेम की अद्वितीय मिसाल

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उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक शहर मुरादाबाद से ताल्लुक रखने वाले मोहम्मद मज़ाहिर खान (रुहेला पठान) भारतीय सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य में एक ऐसा व्यक्तित्व हैं, जिन्होंने अपने विचारों, अटूट सिद्धांतों और दशकों के जमीनी कार्य से समाज में सकारात्मक बदलाव की मिसाल पेश की है। मुख्यधारा की राजनीति से लेकर सामाजिक-धार्मिक सुधारों और शिक्षा के प्रसार तक, उनका जीवन राष्ट्रहित और जनसेवा को समर्पित रहा है।

1. शुरुआती जीवन और वैचारिक क्रांति (1980 का दौर)

मज़ाहिर खान अपने शुरुआती करियर में उत्तर प्रदेश सरकार के उपक्रम ‘पराग मिल्क फैक्ट्री’ में अकाउंट असिस्टेंट के पद पर कार्यरत थे। वे एक स्थिर और सम्मानजनक जीवन जी रहे थे, लेकिन वर्ष 1980 के ऐतिहासिक मुरादाबाद ईदगाह कांड और उसके बाद लगे महीनों लंबे कर्फ्यू ने उनके अंतर्मन को झकझोर कर रख दिया।

उस दौर की राजनीतिक परिस्थितियों और आम जनता को भ्रामक बयानों से गुमराह किए जाने की सच्चाई को देखकर उन्होंने यह महसूस किया कि केवल नौकरी करते हुए समाज का भला नहीं हो सकता। समाज को तुष्टिकरण से बाहर निकालकर सत्य, शिक्षा और राष्ट्रवाद की मुख्यधारा से जोड़ना आवश्यक था। इसी उद्देश्य के साथ उन्होंने अपनी सरकारी नौकरी का त्याग कर दिया और पूर्णकालिक रूप से जनसेवा के पथ पर निकल पड़े।

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2. भारतीय जनता पार्टी और सांगठनिक विस्तार (1984 – 2002)

वर्ष 1984 में वे औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी (BJP) से जुड़े। उस दौर में मुरादाबाद जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में राष्ट्रवादी विचारधारा के साथ कार्य करना एक बड़ी चुनौती था, लेकिन अपनी निष्ठा और कुशल नेतृत्व क्षमता के बल पर उन्होंने संगठन को मजबूत किया:

  • अल्पसंख्यक मोर्चा का नेतृत्व: 1984 से 2002 के बीच उन्होंने भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चे में जिलाध्यक्ष, महानगर अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश राज्य कार्यसमिति सदस्य के रूप में लगातार कार्य किया।
  • महानगर महामंत्री का दायित्व: जब मुरादाबाद को महानगर का दर्जा मिला, तो गठित हुई भाजपा की पहली महानगर कार्यकारिणी समिति में वे महानगर महामंत्री चुने गए।
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3. शासकीय पद, नीतिगत दायित्व और प्रशासनिक अनुभव

अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में मज़ाहिर खान ने राज्य और केंद्र सरकार की विभिन्न महत्वपूर्ण कमेटियों और बोर्डों में रहकर महत्वपूर्ण नीतिगत भूमिकाएँ निभाई हैं:

  • उत्तर प्रदेश राज्य हज कमेटी (उपाध्यक्ष): उत्तर प्रदेश में कल्याण सिंह जी की पहली सरकार के दौरान उन्हें राज्य हज कमेटी का सदस्य मनोनीत किया गया। बाद में वे इसके उपाध्यक्ष पद पर रहे, जहाँ उन्होंने हज यात्रियों की सुविधाओं और पारदर्शिता के लिए महत्वपूर्ण सुधार किए।
  • राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद – NCPUL (शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार): 2014 के बाद केंद्र सरकार के अधीन उन्होंने ‘नेशनल काउंसिल फॉर प्रमोशन ऑफ उर्दू लैंग्वेज’ (NCUL) में लगभग 5 वर्षों तक अपनी सेवाएँ दीं। इस दौरान वे परिषद की एग्जीक्यूटिव बोर्ड (कार्यकारी परिषद), फाइनेंस कमेटी और जनरल बॉडी के सक्रिय सदस्य रहे।
  • पशु कल्याण एवं संरक्षण (SPCA): वर्तमान में वे उत्तर प्रदेश सरकार के पशुपालन विभाग और दुग्ध विकास मंत्रालय के अंतर्गत संचालित सोसाइटी फॉर प्रिवेंशन ऑफ क्रुएलिटी टू एनिमल्स (S.P.C.A.) / पशु क्रूरता निवारण सोसाइटी की राज्य स्तरीय समिति के सदस्य के रूप में कार्यरत हैं।
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4. मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (MRM) और सामाजिक सुधार आंदोलन

वर्ष 2002 से मज़ाहिर खान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ विचारक डॉ. इन्द्रेश कुमार जी के मार्गदर्शन में मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (MRM) से जुड़े। महानगर संयोजक के रूप में यात्रा शुरू कर वे राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचे और वर्तमान में राष्ट्रीय संयोजक (मदरसा एवं उलमा प्रकोष्ठ) का दायित्व संभाल रहे हैं।

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उनकी विचारधारा और मुख्य सामाजिक संकल्प:

  1. राष्ट्रवादी और आधुनिक शिक्षा: उनका दृढ़ विश्वास है कि मुस्लिम समाज का वास्तविक उत्थान मदरसा शिक्षा के आधुनिकीकरण और आधुनिक विषयों के समावेश में है। वे बच्चों को शिशु मंदिर, आदर्श विद्या मंदिर और मुख्यधारा के विद्यालयों से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं।
  2. सच्चे राष्ट्रीय नायकों का सम्मान: वे हमेशा यह संदेश देते हैं कि मुस्लिम युवाओं के आदर्श मध्यकालीन आक्रांता नहीं, बल्कि डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम, वीर अब्दुल हमीद, अशफ़ाक उल्ला खान, ब्रिगेडियर उस्मान और नवाब मज्जू खान जैसे भारत मां के सच्चे सपूत होने चाहिए।
  3. सद्भाव और संवैधानिक सुधारों का समर्थन: मज़ाहिर खान ने राम मंदिर आंदोलन के दौरान सामाजिक सौहार्द बनाने, धारा 370 और 35A को हटाने, तथा तीन तलाक और वक्फ सुधारों जैसे ऐतिहासिक फैसलों का खुलकर समर्थन किया है।

मोहम्मद मज़ाहिर खान (रुहेला पठान) का जीवन इस बात का ज्वलंत उदाहरण है कि जब कोई व्यक्ति निस्वार्थ भावना, सत्य और राष्ट्रप्रेम की राह चुनता है, तो वह न केवल अपने समाज की सोच में सुधार लाता है, बल्कि देश की अखंडता और प्रगति में भी एक अमूल्य योगदान देता है।

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