नई दिल्ली: भारत स्थित फिलिसतीन दूतावास द्वारा जारी एक आधिकारिक प्रेस नोट के अनुसार, इज़राइल द्वारा लगाई गई दमघोंटू वित्तीय नाकेबंदी और गंभीर आर्थिक संकट के कारण फिलिसतीन का स्वास्थ्य क्षेत्र पूरी तरह चरमरा गया है। इस संकट की वजह से हजारों मरीजों की जिंदगी सीधे तौर पर खतरे में आ गई है और पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था ढहने की कगार पर पहुंच चुकी है।
दवाओं का स्टॉक खत्म, कैंसर और किडनी के मरीज प्रभावित
फिलिसतीन स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी चेतावनियों के हवाले से बताया गया है कि देश में आवश्यक दवाओं और चिकित्सा आपूर्ति का स्टॉक लगभग समाप्त हो चुका है।
- कुल 520 आवश्यक दवाओं में से 180 दवाएं पूरी तरह से खत्म हो चुकी हैं। कैंसर के इलाज के लिए जरूरी 97 दवाओं में से 50 दवाएं उपलब्ध नहीं हैं, जिससे 4,000 से अधिक कैंसर मरीजों का जीवन सीधे खतरे में है। दवाओं और प्रयोगशाला सामग्रियों (lab materials) की भारी कमी के कारण किडनी डायलिसिस कराने वाले मरीजों पर भी गंभीर संकट मंडरा रहा है।
हजारों ऑपरेशन टले
आर्थिक तंगी का असर अस्पतालों के कामकाज पर भी साफ देखा जा रहा है। साल 2025 में जहां लगभग 65,000 सर्जरी की गई थीं, वहीं इस साल (1 जून तक) केवल 19,500 सर्जरी ही संभव हो सकी हैं। इसके अलावा, 11,000 से अधिक तयशुदा (शेड्यूल्ड) ऑपरेशनों को टालना पड़ा है, जिसने मरीजों की जान जोखिम में डाल दी है।
संकट की मुख्य वजह: राजस्व पर इज़राइल का कब्जा
इस बदहाली का मुख्य कारण इज़राइल द्वारा फलस्तीन के टैक्स और क्लीयरेंस राजस्व (clearance revenues) को रोकना बताया गया है। इस वजह से फलस्तीनी सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में असमर्थ है। दूसरी ओर, देश में बढ़ती बेरोजगारी, गरीबी और आर्थिक मंदी के कारण अब ज्यादातर नागरिक सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर ही निर्भर हैं, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली पर दबाव कई गुना बढ़ गया है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मदद की गुहार
इस गंभीर मानवीय संकट को देखते हुए फलस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय ने दाता देशों और वैश्विक संस्थाओं से तत्काल मदद की अपील की है। जीवन रक्षक दवाओं के लिए 5 करोड़ (50 मिलियन) अमेरिकी डॉलर और बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं को जारी रखने के लिए अतिरिक्त 5 करोड़ अमेरिकी डॉलर की तत्काल आवश्यकता जताई गई है।
फिलिसतीन सरकार ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय, मानवाधिकार संगठनों और दाता देशों से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है ताकि फलस्तीनी नागरिकों के जीवन और इलाज के अधिकार की रक्षा की जा सके।
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