हिंदू रीति से हुआ जरीन खान का अंतिम संस्कार, जानिए क्यों चर्चाओं में है ये फैसला

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मुंबई: बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता संजय खान की पत्नी और पूर्व अभिनेत्री जरीन खान ने 81 वर्ष की आयु में इस दुनिया को अलविदा कह दिया। लेकिन उनका अंतिम संस्कार एक ऐसी कहानी बन गया, जो धर्म और मानवता के बीच की सच्ची भावना को परिभाषित करता है।

सोशल मीडिया पर मचा तहलका

जब सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो सामने आए, जिनमें जरीन खान के बेटे जायद खान ने हिंदू रीति-रिवाजों से उनका अंतिम संस्कार करते दिखाई दिए, तो लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। आखिर एक पारसी परिवार में जन्मी और मुस्लिम अभिनेता से विवाहित महिला का अंतिम संस्कार हिंदू परंपरा से क्यों? इस सवाल का जवाब खुद उनकी बेटी ने दिया।

बेटी का इमोशनल पोस्ट: मानवता की मिसाल

ज्वैलरी डिजाइनर फराह खान अली ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक दिल छू लेने वाला पोस्ट शेयर किया। उन्होंने अपनी मां को याद करते हुए लिखा, “मेरी मां जरीन खान एक असाधारण महिला थीं। उनका जीवन दर्शन था – ‘माफ करना और भूल जाना’। वह दयालुता की प्रतिमूर्ति थीं, अपने हर दोस्त और परिवार के सदस्य से गहरा प्यार करती थीं।”

फराह ने आगे लिखा, “वह हमारे परिवार की वह धुरी थीं, जो सबको एक धागे में पिरोए रखती थीं। पारसी के रूप में जन्म, मुस्लिम से विवाह और हिंदू रीति से अंतिम संस्कार – यही थी मेरी मां, मानवता की सच्ची प्रतीक। उनकी यह विरासत हमेशा हमारा मार्गदर्शन करेगी।”

Zarine Khan 1

एक अलग पोस्ट में मां का वीडियो शेयर करते हुए फराह ने लिखा, “आज जाने की जिद ना करो, यूं ही पहलू में बैठे रहो… मेरी मां, मेरी हमसफर, वो शख्सियत जिसने अपने प्यार की गर्माहट से अनगिनत जिंदगियों को रोशन किया।”

फराह ने अपनी मां से वादा किया कि वह उनके दोस्तों को अपना बनाएंगी और परिवार को हमेशा एकजुट रखने का उनका सपना पूरा करेंगी। उन्होंने अंत में लिखा, “जब तक हम फिर नहीं मिलेंगे, आपको हर पल याद किया जाएगा। आपकी आत्मा को शांति मिले, मेरी प्यारी मां।”

मां को भावुक विदाई

एक खूबसूरत परिवार की कहानी

जरीन खान और संजय खान के तीन बच्चे हैं – फराह खान अली, सुजैन खान और जायद खान। तीनों ही अपने-अपने क्षेत्र में सफल हैं और आज अपनी मां की विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प ले चुके हैं।

जरीन खान की कहानी यह साबित करती है कि प्रेम और मानवता किसी भी धार्मिक सीमा से बड़ी होती है। उनका जीवन और अंतिम संस्कार दोनों ही सभी धर्मों के सामंजस्य का एक अनूठा उदाहरण बन गए हैं।

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