अगर!

Date:

Agar 1
शायर-साहिर निज़ामी

मैं साय की तरह तुम्हारे साथ-साथ रहूंगा

कभी आगे कभी पीछे,

हजार कोशिशों के बावजूद,

नहीं झटक पाओगे मेरे ख्याल को

अपने ज़हन से

मेरी सूरत को अपनी आँखों से

मेरी यादों को अपने दिल से 

बहुत मुश्किल है

क्यूंकि एक दिन एक साथ जीने-मरने की बात थी 

तुम कैसे भूल जाओगे अपने चेहरे पर मेरी गर्म साँसों को 

अपने जिस्म पर मेरी तैरती उँगलियों को 

न मुमकिन , कभी नहीं

अगर यह सच है कि तुम सौदागर नहीं  

Sahir Nizami
Sahir Nizami-Poet,Writer,Lyricist

-साहिर निज़ामी

    Share post:

    Visual Stories

    Popular

    More like this
    Related

    होली के दौरान प्रतिबंधों के बाद, पुलिस ने संभल में ईद पर नए प्रतिबंध लगाए

    पुलिस द्वारा ईद के दौरान अत्रिरिक्त पुलिस बल भी...

    बिल गेट्स की भविष्य के बारे में आश्चर्यजनक भविष्यवाणी

    माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स अक्सर भविष्य के बारे...

    Police Intensifies Crackdown Against Banned Seperatist Organization In North Kashmir

    Srinagar, March 25: Police on Tuesday said that it...