कहावत है “जिसको अल्लाह रक्खे, उसको कौन चक्खे”! कुछ इसी तरह के अल्फाज एक इंसान की जिंदगी पर उस समय फिट बैठते हैं जब नागिन ने अपने नाग को मौत के घाट उतार देने वाले शख्स को बदला लेते हुए 7 बार डस लिया। हालांकि नागिन के बदले पर हर बार उस शख्स की जिंदगी भारी पड़ रही है।
रामपुर में घटी कुदरत की अजीबोगरीब घटना
जनपद रामपुर के स्वार तहसील क्षेत्र अंतर्गत ग्राम मिर्जापुर का रहने वाला एहसान उर्फ बबलू अपने गांव से सटे एक कृषि फार्म पर नौकरी करता है। बात 7 महीने पुरानी है, वह इसी फार्म पर मौजूद था तभी उसका सामना एक नाग और नागिन से हो गया। अहसान उर्फ बबलू ने आनन-फानन में नाग को लाठी के वार से मौत के घाट उतार दिया जबकि नागिन बच कर निकल गई।
नागिन का बदला
फिर शुरू हुआ नागिन के बदलेगा खेल। ठीक फिल्मी कहानी की तरह नागिन ने मौका पाकर कुछ दिन के बाद बबलू को अपने जहरीले दातों से डस कर बदला ले लिया। हालांकि समय रहते और ठीक समय पर उपचार मिलने के चलते बबलू मौत और जिंदगी के इस खेल में जीत गया और वह ठीक हो गया
फिर कुछ दिन के बाद नागिन ने एक बार फिर हमला बोलते हुए उसे डस लिया लेकिन फिर भी उसे समय पर उपचार के चलते जिंदगी नसीब हुई।
सिलसिला पिछले 7 महीने से जारी
यह सिलसिला पिछले 7 महीने से जारी है। नागिन अपना बदला लेते हुए उसे 7 बार डस चुकी है और हर बार की तरह बबलू जिंदगी की जंग जीता चला जा रहा है।
नागिन भी बचने में कामयाब है
अहसान उर्फ बबलू की जिंदगी और नागिन के बदले की अजीबोगरीब कहानी दूर-दूर तक फैल चुकी है। हालांकि बबलू पर काली नागिन के खौफ का साया लगातार गहराता जा रहा है। वहीं नागिन भी बबलू की लाठी के वार से अपने आप को बचाने में कामयाब हो रही है।
इस सच्ची कहानी में कुदरत हर बार जहां बबलू का साथ दे रही है तो वही एक तरह से नागिन भी नसीब वाली बनकर उभर रही है।
अब इस खौफनाक कहानी का अंत कैसे होगा इसका जवाब तो समय ही बातएगा। बरहाल यह कहानी लगातार आसपास के इलाके में चर्चा का विषय बनती चली जा रही है लोग पहली बार नागिन फिल्म की कहानी 7 महीने से असलियत में देखते चले आ रहे हैं।
पीड़ित किसान एहसान के मुताबिक अब से 7 महीने पहले से में यहां मेहनत मजदूरी करता हूं, बहुत ही गरीब हूं मैं…2 सांप मेरे धोरे हमलावर हुए। मैंने एक उनमें से मार दिया और गड्ढा खोद के दाब दिया। अब पता नहीं वह नाग मरा या नागिन मरी। जब से जो है…वह पीछे पड़ा है।
एहसान के 4 बच्चे छोटे-छोटे हैं और वह खेत में मजदूरी करके अपने परिवार का पालन पोषण करता है। लेकिन जब भी खेत पर जाता है सांप उसके ऊपर हमला कर देता है। अभी तक गांव वालों के समय से पहुंच जाने और इलाज हो जाने से एहसान बचता रहा है नहीं तो एहसान का कहना है कि वह अभी तक मर गया होता।
एहसान का कहना है कि 7 महीने पहले की बात है जब उसने सांप को मारा था तभी से मौक़ा मिलते ही सांप उसे काटने पर लगा हुआ है, अभी परसों ही काटा है। अब तक यह सांप एहसान को 7 दफा काट चुका है।
एहसान ने बताया,”खेत में फावड़ा चला रहा हूं… मेहनत मजदूरी कर रहा हूं। खेत में आया चुपके से पीछे से और मुझे काट लिया मुंह मार दिया मेरे। नहीं मुझे एहसास नहीं होता है जब वह काट लेता है तब पता चलता है… अलग-अलग खेत हैं जहां जाता हूँ, वह वही पहुंच जाता है।
सरकार से मुआवज़े की मांग
एहसान का कहना है,”अब सोच रहा था मैं गरीब आदमी हूँ… सरकार मुझे मुआव्ज़ा दे दे… मेरे छोटे-छोटे 4 बच्चे हैं। कभी भी हादसा हो सकता है…कुछ भी हो सकता है। बिल्कुल काले थे बहुत बड़े सांप थे बिल्कुल असली और मुझे सातों दफा असली सांप ने काटा। पांच पांच खुराके पी है मैंने जब होश आता है मुझे। सर बहुत दहशत है मेरी बीवी मेरे बच्चे मुझसे मना करते हैं मत जाओ लेकिन मैं गरीब हूं तो क्या करूं घर में कोई और कमाने वाला नहीं। मैं चाहता हूं सर थोड़ी मदद हो जाए मेरा थोड़ा सा हरा हो जाए यह चाहता हूं।
फार्म मालिक सत्येंद्र के मुताबिक अब से 7 महीने पहले सांप ने काटा था, जोड़ा था। एक मार दिया इसने उसके बाद यह है कि कभी भी सांप काट लेता है फिर इसे लेकर जाना पड़ता है दिखाने के लिए… यह बड़ा परेशान है। छोटे-छोटे 4 बच्चे हैं और एक तरीके से पीड़ित है। इस बात को करीब 7-8 महीने हो गए इसे 6 से 7 बार काट चुका है। जब काट लेता है तो उसको लेकर जाया जाता है दिखाने के लिए… तो दवाई दिलवा जाती है…उससे ठीक होता है। मगर इससे हेबत है कि मेरे पीछे पड़ा हुआ है। यही हो सकता है बदले की भावना से काट रहा है जोड़ा था वो उसमें एक मार दिया साप ये बताते हैं कि कोबरा की नस्ल से है।
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