लखनऊ: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आजम खान शुक्रवार को लखनऊ में सपा प्रमुख अखिलेश यादव से मिलने पहुंचे। यह दोनों नेताओं के बीच एक महीने के भीतर दूसरी मुलाकात थी, जो राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है।
एक महीने में दूसरी मुलाकात
आजम खान बेटे अब्दुल्ला आजम के साथ अखिलेश यादव के आवास पर पहुंचे, जहां दोनों नेताओं के बीच करीब 45 मिनट तक बंद कमरे में चर्चा हुई। इससे पहले 8 अक्टूबर को अखिलेश यादव स्वयं रामपुर पहुंचकर आजम खान से मिले थे और उन्हें पार्टी का मजबूत स्तंभ बताया था।
अखिलेश की भावुक प्रतिक्रिया
अखिलेश यादव से मुलाकात के बाद आजम ने कहा कि कुछ हाले दिल उन्होंने कहा, कुछ हाले दिल हमने कहा। इसके साथ ही अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर भावुक होते हुए लिखा, “न जाने कितनी यादें संग ले आए, जब वो आज हमारे घर पर आए! ये जो मेलमिलाप है यही हमारी साझा विरासत है”। दोनों नेताओं के बीच पीढ़ियों से चले आ रहे पारिवारिक रिश्तों की भी चर्चा हुई। यही हमारी साझा विरासत है।
मुलाकात के बाद आजम खान ने मीडिया से बातचीत में कहा, “मुलाकात में क्या हुआ ये तो नहीं बताया जा सकता… बस इतना कहूंगा कि यह रिश्तों की मुलाकात थी, कोई नई मुलाकात नहीं… ये सिर्फ़ राजनीतिक रिश्ते नहीं हैं, बल्कि उस ज़माने के हैं (अखिलेश यादव के पिता के ज़माने के) जब हम सिर्फ़ विधायक थे और उस वक्त ये गुमान भी नहीं था कि हम कभी सरकार बना पाएंगे… आगे भी उम्मीद करते हैं कि हम सरकार बनाएंगे… बस फर्क इतना होगा कि हमें पता नहीं था कि सरकार का काम क्या-क्या होता है, हम तो बस ये समझते थे कि वहां बैठे आखिरी व्यक्ति को देखें कि कहीं उसकी आंखें नम तो नहीं, अगर हैं तो उसके आंसू पोंछें, अगर वह बेसहारा है तो सरकार उसका सहारा बने, हमें नहीं पता था कि सरकार का काम किसी को बर्बाद कर देना, फ़ना कर देना, खानदानों को नेस्तनाबूद कर देना भी है… इसका क्या अंजाम होगा? इस अंजाम से बचाने के लिए हम सब लोग मिलकर चाहते हैं कि कोशिश करें और हालात ऐसे हैं कि कोशिश बेकार नहीं जाएगी।”
सीएम योगी के माफिया मुक्त उत्तर प्रदेश के बयान पर आजम ने कहा, “मैं खड़ा तो हूं सबसे बड़ा माफिया आपके सामने, मैं नंबर-1 माफिया हूं। मुझसे बड़ा माफिया कौन है? हमारी मिसालें दी जाएंगी।” उन्होंने देश के बिगड़ते माहौल पर चिंता जताते हुए बदलाव के लिए एकजुटता का आह्वान किया। इस मुलाकात को लेकर राजनीतिक समीक्षकों ने इसे सपा के भीतर तालमेल की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना है।
मुलाकात से एक दिन पहले, मुख्तार अंसारी के बड़े भाई सिबगतुल्लाह अंसारी भी आजम खान से मिलने लखनऊ के एक होटल पहुँचे थे, जिससे सियासी सरगर्मी और बढ़ गई है। आजम खान सितंबर 2023 में सीतापुर जेल से रिहा हुए थे, और तब से उनकी राजनीतिक सक्रियता बढ़ी है।
इस मुलाकात को लेकर आजम ने कहा कि उनके और अखिलेश के रिश्ते केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि वर्षों से चले आ रहे पारिवारिक रिश्ते हैं, जिनके चलते वे उम्मीद करते हैं कि भविष्य में पार्टी मजबूती से सरकार बनाएगी। उन्होंने यह भी व्यक्त किया कि सरकार का सच्चा मकसद लोगों के दुख बांटना नहीं, बल्कि उनका सहारा बनना होना चाहिए।
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