कोलकाता में आयोजित UNICON-45: तिब्ब-ए-यूनानी के विकास पर विशेषज्ञों ने रखी राय

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कोलकाता में ऑल इंडिया यूनानी तिब्बी कांग्रेस (पश्चिम बंगाल) द्वारा आयोजित UNICON-45 में विशेषज्ञों ने तिब्ब-ए-यूनानी की मौजूदा स्थिति और भविष्य पर विचार साझा किए। डॉ. श्याम सुंदर कुंडू, डॉ. सैयद अहमद खान और कई विशेषज्ञों ने सरकार से यूनानी चिकित्सा के विकास के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की।

कोलकाता/नई दिल्ली। ऑल इंडिया यूनानी तिब्बी कांग्रेस (पश्चिम बंगाल) की ओर से UNICON-45 सम्मेलन का आयोजन पश्चिम बंगाल उर्दू अकादमी के ऑडिटोरियम में किया गया। कार्यक्रम का विषय था — “आयुष में तिब्ब-ए-यूनानी की स्थिति”। इस अवसर की अध्यक्षता डॉ. श्याम सुंदर कुंडू ने की।

तिब्ब-ए-यूनानी को मिल रही वैश्विक पहचान

अपने अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. कुंडू ने कहा कि आज देश और विदेश में तिब्ब-ए-यूनानी को कदर और आशा की दृष्टि से देखा जा रहा है। उन्होंने भारत सरकार के आयुष मंत्रालय और अफगानिस्तान के स्वास्थ्य मंत्रालय के बीच हुए हालिया समझौते का उल्लेख करते हुए बताया कि इस सहयोग के तहत अफगानिस्तान में एक यूनानी मेडिकल रिसर्च सेंटर की स्थापना की जाएगी। यह यूनानी शिक्षा के विस्तार की दिशा में ऐतिहासिक कदम है।
उन्होंने प्रांतीय सरकारों से अपील की कि वे तिब्ब-ए-यूनानी के संरक्षण और विकास पर गंभीरता से ध्यान दें, क्योंकि कई राज्यों में इसकी स्थिति चिंताजनक है।

प्रांतीय सरकारों के रवैये पर नाराज़गी

ऑल इंडिया यूनानी तिब्बी कांग्रेस के महासचिव डॉ. सैयद अहमद खान ने कहा कि कई राज्यों में सरकारें यूनानी चिकित्सा के प्रति उपेक्षा दिखा रही हैं। उन्होंने बताया कि असम में अभी तक यूनानी डॉक्टरों का पंजीकरण नहीं हुआ है और पश्चिम बंगाल में 1998 के बाद से कोई नई नियुक्ति नहीं की गई। उन्होंने राज्य में यूनानी औषधालयों की संख्या बढ़ाने और होम्योपैथी व आयुर्वेद की तरह यूनानी डॉक्टरों की नियुक्ति की मांग की।

“सरकार के संरक्षण के बिना विकास संभव नहीं”

प्रो. मुहम्मद अयूब कासमी ने कहा कि किसी भी चिकित्सा पद्धति का विकास सरकार के संरक्षण के बिना संभव नहीं है। उनके अनुसार पश्चिम बंगाल में 1996 के बाद नई यूनानी डिस्पेंसरी नहीं खोली गई है। उन्होंने राज्य सरकार से तिब्ब-ए-यूनानी को बढ़ावा देने के लिए कदम उठाने की अपील की।

यूनानी कॉलेज की स्थापना की घोषणा

मुख्य अतिथि डॉ. सिकंदर हयात सिद्दीकी (पूर्व निदेशक, यूनानी, उत्तर प्रदेश सरकार) ने कहा कि यूनानी चिकित्सकों को अपनी काबिलियत का ईमानदारी से इस्तेमाल करते हुए इस विधा के प्रति समर्पण दिखाना चाहिए।
सम्मानित अतिथि शेख मुहम्मद अयाजुल हक (सदस्य, टीएमसी स्टेट कोर कमेटी) ने कहा कि पश्चिम बंगाल में एक गवर्नमेंट यूनानी मेडिकल कॉलेज की स्थापना की जाएगी। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि यूनानी चिकित्सा से जुड़ी सभी मांगें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के समक्ष रखी जाएंगी।

केंद्र सरकार से विस्तारीकरण की मांग

डॉ. रहमतुल्लाह रहमानी (सीएमओ यूनानी, सीजीएचएस) ने कहा कि पूरे देश में सीजीएचएस यूनानी डिस्पेंसरी की संख्या मात्र 12 है। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि प्रत्येक राज्य की राजधानी में कम से कम एक यूनानी डिस्पेंसरी खोली जाए।

इस अवसर पर डॉ. सैयद इम्तियाज़ हुसैन जिलानी, प्रो. नईम अनीस, डॉ. असदुल्लाह, डॉ. सफ़दर इस्माइल, डॉ. बदरुल इस्लाम कैरानवी, डॉ. निज़ामुद्दीन सहित कई विशेषज्ञों ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम में कोलकाता के अलावा दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र से बड़ी संख्या में प्रतिनिधि शामिल हुए।

कार्यक्रम के अंत में डॉ. मुजीब-उर-रहमान, नेशनल सेक्रेटरी, ऑल इंडिया यूनानी तिब्बी कांग्रेस ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।

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