नई दिल्ली, 25 दिसंबर 2025: जामिया मिलिया इस्लामिया ने 25 दिसंबर को एक भव्य जश्न-ए-जौहर का आयोजन किया, जो विश्वविद्यालय के संस्थापक और स्वतंत्रता सेनानी मौलाना मोहम्मद अली जौहर की याह में मनाया जाता है। यह वार्षिक परंपरा विश्वविद्यालय के एल्युमनाई को एक मंच देती है ताकि वे एक दूसरे से जुड़ सकें और अपने अल्मा मेटर के साथ अपने रिश्ते को मजबूत कर सकें।
आयोजन स्थल और समय
इस बार यह कार्यक्रम जामिया मिलिया इस्लामिया के जामिया स्कूल कैंपस में आयोजित किया गया, जहां हजारों एल्युमनाई दूर-दूर से शिरकत के लिए आए। आयोजकों ने इस बार 5,000 से 7,000 लोगों की भीड़ की उम्मीद की थी, जो एक विशाल जमावड़ा था। कार्यक्रम शाम 6 बजे शुरू हुआ और देर रात तक जारी रहा जिसमें सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए।
कार्यक्रम का महत्व
जश्न-ए-जौहर की परंपरा जामिया की स्थापना के दौर से चली आ रही है। मौलाना मोहम्मद अली जौहर जामिया मिलिया इस्लामिया के संस्थापकों में से एक थे और स्वतंत्रता संग्राम में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इस कार्यक्रम के माध्यम से जामिया पूरे देश और विदेश से आने वाले अपने लाखों एल्युमनाई को सम्मानित करता है, उन्हें याद करता है जिन्होंने संस्था के विकास में योगदान दिया है।

कार्यक्रम की संरचना
इस साल के जश्न-ए-जौहर को इसके आयोजकों- नदीम चौधरी, कय्यूम ख़ान, सय्यद काज़िम और मो. ज़ुबैर आदि ने एक विशेष तरीके से डिजाइन किया था जिसमें कई सांस्कृतिक और सामाजिक तत्व शामिल थे:
सांस्कृतिक कार्यक्रम: कार्यक्रम की शुरुआत पवित्र कुरान की तिलावत से शुरू हुई और इसके बाद जामिया का तराना गाया गया, जो विश्वविद्यालय की सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है। इसके बाद प्रतिष्ठित एल्युमनाई को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में कव्वाली का भी विशेष आयोजन किया गया था, जो शाम को संगीत और आध्यात्मिकता का स्पर्श जोड़ता है।
क्रिकेट टूर्नामेंट: इस बार की एक खासियत यह थी कि आयोजकों ने क्रिकेट टूर्नामेंट का भी आयोजन किया था। एल्युमनाई के लिए 8 टीमें बनाई गई थीं और सुबह 9:30 बजे से मैचेस शुरू होकर शाम चला। यह कार्यक्रम एल्युमनाई के बीच खेलकूद की भावना और स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है।
डिनर और सामाजिक मिलन
कार्यक्रम की मुख्य विशेषता एल्युमनाई के लिए भव्य डिनर था, जहां हजारों लोग ने एक साथ डिनर किया। यह न केवल एक भोजन का आयोजन था, बल्कि एक सामाजिक मिलन का अवसर है जहां विभिन्न पीढ़ियों के एल्युमनाई एक दूसरे से मिलने का बेहतरीन अवसर था।
इस साल के कार्यक्रम में भारत के विभिन्न हिस्सों से एल्युमनाई ने शिरकत की। उत्तर प्रदेश, बिहार और देश के अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। अपने-अपने क्षेत्र में विशेष योगदान देने वाली हस्तियों को भी सम्मानित किया गया। इसके अलावा, विदेशों से भी अनेक एल्युमनाई भाग लेने आए थे — सऊदी अरब, दुबई, कुवैत, कतर, ओमान और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देशों से लोगों ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस बार छात्रों ने विश्वविद्यालय की बेहतरी के लिए विशेष रूप से स्कूल, हॉस्टल और मेडिकल कॉलेज के निर्माण में सहयोग देने का प्रस्ताव वाइस चांसलर के समक्ष रखा, जिसकी व्यापक सराहना की गई।

आयोजकों का संदेश
कार्यक्रम के आयोजकों ने यह सुनिश्चित किया कि यह समारोह पूरी तरह से एक संस्कृतिक और भाईचारे का कार्यक्रम बना रहे, जहां किसी तरह की राजनीति न हो। उन्होंने जोर दिया कि मौलाना मोहम्मद अली जौहर की स्मृति में बने इस कार्यक्रम में सभी लोग मौजूद हों और एक साथ मिलकर जामिया की विरासत को सम्मान दें।
मीडिया कवरेज
कार्यक्रम को एक्सटेंसिवली मीडिया कवरेज मिला। यूट्यूब चैनलों, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे इंस्टाग्राम और फेसबुक पर कार्यक्रम की लाइव स्ट्रीमिंग और अपडेट्स साझा किए गए। एल्युमनाई के विचार और कार्यक्रम की हाइलाइट्स को मीडिया द्वारा व्यापक कवरेज दी गई।
जामिया की विरासत और भविष्य
जश्न-ए-जौहर केवल एक वार्षिक समारोह नहीं है, बल्कि यह जामिया की सांस्कृतिक पहचान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। एल्युमनाई मिलन के माध्यम से, जामिया न केवल अपनी विरासत को संरक्षित करता है, बल्कि भविष्य की योजनाओं पर भी चर्चा करता है। कार्यक्रम में नीति निर्माता, राजनीतिक नेता, और शिक्षाविद् शामिल होते हैं जो विश्वविद्यालय के भविष्य के लिए सुझाव देते हैं।
इस तरह, 25 दिसंबर 2025 का जश्न-ए-जौहर जामिया मिलिया इस्लामिया की विरासत, भाईचारे और उत्कृष्टता का एक भव्य उदाहरण था, जहां हजारों एल्युमनाई एक साथ अपने संस्थान को सम्मान देने के लिए एकजुट हुए।
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