नई दिल्ली/मुरादाबाद: उत्तर प्रदेश में मस्जिदों के नाम और बाबरी मस्जिद के संदर्भ को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। मजलिस-ए-उलेमा-ए-हिंद के प्रवक्ता मिर्जा मुर्तजा इकबाल द्वारा शहर में लगाए गए कुछ पोस्टरों पर नाराजगी जताने के बाद, अब मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के नेता मज़ाहिर खान ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।
मिर्जा मुर्तजा इकबाल: “धार्मिक तनाव पैदा करने की कोशिश”
उर्दू समाचार पत्र ‘इंकलाब’ में प्रकाशित खबर के अनुसार, मिर्जा मुर्तजा इकबाल ने शहर में लगाए गए कुछ पोस्टरों को ‘भड़काऊ’ करार दिया है। उनका आरोप है कि इन पोस्टरों में मुख्यमंत्री की तस्वीर के साथ आपत्तिजनक नारे जैसे “क़यामत तक बाबरी नहीं बना पाओगे” लिखे गए हैं। इकबाल ने कहा कि ऐसे प्रयास सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने और मुसलमानों को डराने के लिए किए जा रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से ऐसे तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
मज़ाहिर खान (मुस्लिम राष्ट्रीय मंच) का जवाब: “बाबरी नाम ही क्यों ज़रूरी?“
मिर्जा मुर्तजा इकबाल के रुख पर पलटवार करते हुए मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के मज़ाहिर खान ने अपनी बात रखी है। खान ने स्पष्ट किया कि हिंदुस्तान में मस्जिदें बनाने पर कोई पाबंदी नहीं है, बशर्ते वे कानूनी और शरीयत के पैमानों को पूरा करती हों।
उन्होंने सीधे तौर पर सवाल उठाया कि:”क्या बाबरी नाम रखना ही ज़रूरी है?”
उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ भाईचारे की बात की जाती है और दूसरी तरफ ‘बाबरी’ नाम का प्रचार-प्रसार कर करोड़ों लोगों को ‘जज्बाती तौर पर ब्लैकमेल’ करने की कोशिश की जाती है।
खान ने सुझाव दिया कि किसी भी अन्य नाम से कहीं भी मस्जिद बनाई जा सकती है, उसमें कोई रुकावट नहीं है, लेकिन एक विशेष नाम को मुद्दा बनाना आपसी सद्भाव के खिलाफ है।
टकराव के बिंदु
जहाँ एक ओर उलेमा परिषद इसे धार्मिक पहचान और लोकतंत्र पर हमला बता रही है, वहीं मुस्लिम राष्ट्रीय मंच इसे अनावश्यक भावनाओं को भड़काने का जरिया मान रहा है। मिर्जा मुर्तजा इकबाल ने ‘घर वापसी’ जैसे दावों पर भी चिंता जताई है, जबकि मज़ाहिर खान का मानना है कि नाम की जिद छोड़कर विकास और भाईचारे पर ध्यान देना चाहिए।
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