प्योंगयांग: उत्तर कोरिया में चल रही राजनीतिक हलचलों के बीच एक बड़ा फैसला सामने आया है। किम जोंग-उन (Kim Jong-un) को एक बार फिर सर्वसम्मति से देश की सत्ताधारी वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया (WPK) का महासचिव चुन लिया गया है। इस पुनर्चयन के साथ ही किम जोंग-उन के हाथों में देश की बागडोर और भी मजबूती से आ गई है।
5 साल बाद हुई महत्वपूर्ण ‘नेशनल कांग्रेस’
उत्तर कोरिया की सत्तारूढ़ पार्टी की यह महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कांग्रेस 5 वर्षों के अंतराल के बाद आयोजित की गई थी। इस बैठक की कुछ मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:
- हजारों प्रतिनिधियों की उपस्थिति: बैठक में हजारों पार्टी अधिकारियों, उच्च पदस्थ सरकारी प्रतिनिधियों और सैन्य दिग्गजों ने हिस्सा लिया।
- पूर्ण विश्वास: सभी प्रतिभागियों ने किम जोंग-उन के नेतृत्व पर अटूट विश्वास जताया और आगामी वर्षों के लिए प्रस्तावित राष्ट्रीय नीतियों का समर्थन किया।
- रणनीतिक दिशा: बैठक में देश की राजनीतिक, रक्षात्मक और आर्थिक रणनीतियों को और अधिक सशक्त बनाने पर जोर दिया गया।
सैन्य नेतृत्व ने दोहराई निष्ठा
सम्मेलन के दौरान उत्तर कोरियाई सेना के शीर्ष नेतृत्व ने किम जोंग-उन के प्रति अपनी ‘अटूट निष्ठा’ को फिर से दोहराया। सैन्य कमांडरों ने स्पष्ट किया कि वे नेता के हर आदेश का पालन करने और देश की सुरक्षा एवं रक्षा रणनीति को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने दी बधाई
किम जोंग-उन की इस जीत पर वैश्विक प्रतिक्रिया भी देखने को मिली है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उन्हें फिर से महासचिव चुने जाने पर बधाई दी।
“चीन और उत्तर कोरिया के बीच की पारंपरिक मित्रता को और मजबूत किया जाएगा। हम द्विपक्षीय सहयोग के विस्तार और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध हैं।” – शी जिनपिंग
किम जोंग-उन का फिर से चुना जाना यह दर्शाता है कि उत्तर कोरिया के आंतरिक प्रशासन और सेना पर उनकी पकड़ पहले से कहीं अधिक मजबूत है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि उनकी नई आर्थिक और रक्षा नीतियां वैश्विक राजनीति पर क्या प्रभाव डालती हैं।
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