अमेरिका-इज़राइल के ईरान पर हमले की जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने की निंदा, दी गंभीर चेतावनी

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JIH Chief Condemns US-Israel Strikes on Iran, Warns of Regional War

नई दिल्ली | 28 फरवरी 2026: ईरान के आसमान में गूँजते धमाकों और तेहरान से आती धुएँ की लपटों ने दुनिया को एक ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है, जहाँ से वापसी का रास्ता कठिन नज़र आता है। अमेरिका और इज़राइल के इस कथित संयुक्त हमले पर प्रतिक्रिया देते हुए जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के अध्यक्ष सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून की ‘धज्जियाँ उड़ाना’ करार दिया है।

‘मिसाइलें शांति नहीं लातीं’

हुसैनी ने अपने बयान में कूटनीति की विफलता पर दुख जताया। उन्होंने कहा:

“सुरक्षा चिंताओं का हल मेज पर बैठकर निकलता है, आसमान से बरसते बमों से नहीं। इज़राइल का यह रवैया और अमेरिका का उसे मिलता खुला समर्थन पश्चिम एशिया को एक ऐसे दलदल में धकेल रहा है, जिसका खामियाजा पूरी दुनिया को भुगतना होगा।”

क्षेत्रीय अस्थिरता और मानवीय संकट

जमाअत ने आगाह किया है कि यह केवल दो देशों की लड़ाई नहीं है, बल्कि एक व्यापक क्षेत्रीय युद्ध (Regional War) का आगाज हो सकता है।

  • आम नागरिक: तेहरान और अन्य शहरों में धमाकों से आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त है।
  • आर्थिक झटका: इस टकराव से वैश्विक तेल बाज़ार और सप्लाई चेन पर बुरा असर पड़ना तय है।
  • अधिकारों का हनन: अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की चुप्पी ने उनकी साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

भारत की भूमिका: ‘मूकदर्शक न बने नई दिल्ली’

जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने केंद्र सरकार से अपील की है कि भारत को इस संकट में एक ‘मजबूत और स्वतंत्र’ स्टैंड लेना चाहिए। संगठन का कहना है कि भारत की पहचान हमेशा शांतिदूत की रही है, ऐसे में उसे वैश्विक मंचों पर सीज़फ़ायर और बातचीत के लिए दबाव बनाना चाहिए।

मुस्लिम देशों की ‘खामोशी’ पर प्रहार

हुसैनी ने मुस्लिम देशों को भी आईना दिखाते हुए कहा कि एकता और जिम्मेदारी के बिना इस संकट को टालना नामुमकिन है। उन्होंने ज़ोर दिया कि स्थायी शांति केवल ‘इंसाफ’ की बुनियाद पर ही मुमकिन है, सैन्य दबाव से नहीं।