लोग विदेशी सर जमीन पर जी तोड़ मेहनत करके पैसा कमाते हैं और जिंदगी जीने के लिए जरूरी हर चीज को हासिल कर लेते हैं लेकिन अगर उनको नहीं मिलता तो वह है सुकून जो अपने देश की माटी में है। इसकी मिसाल देखने को मिली पंचायत चुनाव में जहां रामपुर का निवासी एक व्यक्ति विदेश में अच्छी खासी नौकरी छोड़ कर प्रधानी का चुनाव लड़ने अपने गांव लौट आया।
उत्तर प्रदेश के जनपद रामपुर के गांव बढ़पुरा शुमाली के मोहम्मद हनीफ वर्ष 2002 में गर्ल्स स्थित अमीर मुल्क कतर में नौकरी करने के लिए चले गए। क़तर में उन्होंने एक कंपनी में बतौर जनरल सुपरवाइजर के रूप में नौकरी करने के बाद 17 साल तक जी तोड़ मेहनत की और अच्छा खासा रुपया और पैसा कमाया।
कंपनी में जनरल सुपरवाइजर होने के नाते अपने मातहतों पर जमकर हुकुम भी चलाया लेकिन उनके ज़हन से अपने गांव की यादें ना मिट सकीं। क़तर में गाड़ियों से जगह जगह घूमने के बाद देखी गई वहां की बस्तियों, गांव और कस्बों की तस्वीरों ने उनके जहन में उन्हीं जैसी तस्वीर हिंदुस्तान में मौजूद उनके छोटे से अविकसित गांव बढ़पुरा शुमाली की भी बनती रही।
नौजवान मोहम्मद हनीफ के ज़हन में क़तर में मौजूद गांवों और बस्तियों को देखकर एक ऐसी तस्वीर घूम रही थी कि उन्हें अपनी अच्छी खासी नौकरी छोड़ कर 2 साल पहले रामपुर स्थित अपने छोटे से गांव मैं आने को मजबूर होना पड़ा ताकि वह अपने इस गांव की अविकसित छवि को सरकार द्वारा संचालित योजनाओं के माध्यम से बेहतर से बेहतर कर सकें।
एनआरआई रह चुके मोहम्मद हनीफ ने क़तर में देखे गए अपने सपने को साकार करने के लिए अपने गांव बढ़पुरा शुमाली से प्रधानी पद के लिए चुनावी ताल ठोकी है। शांत स्वभाव के मोहम्मद हनीफ गांव की गलियों में घूम घूम कर लोगों से अपने पक्ष में वोट देने की गुजारिश करते हैं तो वहीं वह मुस्कुराकर वोटरों से उन्हें वोट देने की मिन्नतें भी करते हैं।
बहरहाल पंचायत चुनाव में जनसंपर्क का दौर जारी है और 15 अप्रैल को वोटिंग होनी है। अब देखने वाली बात होगी की वह वोटरों के दिल में अपनी छाप छोड़ कर प्रतिद्वंदियों को चित करने के बाद प्रधानी की कुर्सी पर क़ाबिज़ हो पाएंगे या नहीं यह तो आने वाला समय ही बताएगा लेकिन इतना जरूर है की वह एक लंबे अरसे तक विदेश में रहने के बाद भी अपने इस छोटे से गांव और यहां के बाशिंदों को नहीं भूले हैं।
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