रामपुर: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव गुरुवार को रामपुर पहुंचे और जिला जेल में पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान से मुलाकात की। जेल से बाहर आने के बाद अखिलेश यादव ने आजम खान के समर्थन में तीखा हमला बोलते हुए कहा, “रामपुर की धरती से आदरणीय आज़म खान साहब के लिए हमारा यही ऐलान है—जो आज़म थे, वो आज़म हैं, वो आज़म रहेंगे।”
जेल में हुई मुलाकात
अखिलेश यादव जौहर यूनिवर्सिटी के हेलीपैड पर उतरे, जहां उनका स्वागत पार्टी कार्यकर्ताओं और आजम खान के परिवार के सदस्यों ने किया। इसके बाद वे रामपुर जिला जेल पहुंचे और आजम खान से मुलाकात की। अखिलेश के साथ आजम खान के बेटे अदीब आजम भी थे। मुलाकात को लगभग 45 मिनट का समय दिया गया, जबकि कुछ रिपोर्ट्स में इसे करीब एक घंटे की बातचीत बताया गया।
मुलाकात के बाद अखिलेश यादव आजम खान के आवास पर गए और उनकी पत्नी डॉ. तंजीन फातिमा समेत परिवार के सदस्यों से मिले। उन्होंने कहा कि आजम खान से उनका रिश्ता सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि भावनात्मक है।
‘सच को कैद नहीं कर सकते फर्जी मुकदमे’
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि आजम खान के परिवार के साथ बड़ी नाइंसाफी हुई है और उन पर झूठे मामले दर्ज किए गए। उन्होंने कहा, “फर्जी मुकदमों में इतनी ताकत नहीं है कि वो सच को कैद कर सकें। षड्यंत्र रचकर किसी को कैद में रखने वाला भी हमेशा अपने दिमाग की जेल में डरकर बंद रहता है।”
सपा अध्यक्ष ने कहा कि भ्रष्ट अधिकारी और फर्जी मुकदमे भाजपाई शासन-प्रशासन के दो अहम हथियार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भाजपा की नाइंसाफी का इतिहास लिखा जाएगा, तो रामपुर का नाम सबसे ऊपर आएगा।
जौहर यूनिवर्सिटी पर हमला
अखिलेश यादव ने जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर भी भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी को बंद करने की साजिश दरअसल पीडीए से पढ़ाई के अधिकार छीनने का षड्यंत्र है। उन्होंने कहा, “जो हजारों स्कूल बंद कर सकते हैं, वे यूनिवर्सिटी को क्या छोड़ेंगे।”
उन्होंने आगे कहा कि भाजपा का इल्म और तालीम से कोई लेना-देना नहीं है और पार्टी शिक्षा के मुद्दे पर “सिफर” है। अखिलेश ने दावा किया कि बदले की भावना रखने वाली भाजपा को जनता हमेशा के लिए बदल देगी।
चुनावी सियासत गरमाई
2027 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले अखिलेश यादव की आजम खान से यह मुलाकात राजनीतिक रूप से बेहद अहम मानी जा रही है। अखिलेश ने कहा कि इस मुलाकात में कोई सीट नहीं मांगी गई, बल्कि आजम खान ने सुझाव दिए, जिन्हें उन्होंने ले लिया।
भाजपा ने इस दौरे को 2027 के चुनाव से पहले मुस्लिम मतदाताओं को लुभाने की कोशिश और चुनावी शो बताया है। वहीं सपा नेतृत्व इसे आजम खान के साथ पुराने रिश्ते और पार्टी में उनकी अहमियत का संदेश बता रहा है।
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