मनरेगा पर चोट ग्रामीण भारत पर हमला है: सनोवर आलम

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कांग्रेस नेता सनोवर आलम ने मनरेगा के नए प्रावधानों पर तीखा विरोध। ग्रामीण गरीबों की जीवनरेखा कमजोर करने का आरोप। बजट, पेमेंट सुधार की मांग। 

कदवा, कटिहार (20 दिसंबर, 2025): कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) से जुड़े हालिया प्रावधानों को ग्रामीण भारत के हितों के विरुद्ध बताते हुए तीखी आपत्ति दर्ज कराई है। नेताओं ने कहा कि मनरेगा केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि देश के करोड़ों ग्रामीण गरीबों और मजदूरों के लिए जीवनरेखा है, जिसे कमजोर करना सीधे तौर पर ग्रामीण रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता पर हमला है।

पत्रकारों से बातचीत करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सनोवर आलम ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा के बजट, भुगतान व्यवस्था और क्रियान्वयन से जुड़े कदमों ने इस योजना के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि मनरेगा ने ग्रामीण गरीबों को भीख नहीं, बल्कि श्रम के बदले सम्मानजनक रोजगार दिया है। ऐसी जनकल्याणकारी योजना के स्वरूप से छेड़छाड़ करना ग्रामीण समाज को हाशिये पर धकेलने जैसा है।

सनोवर आलम ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि मनरेगा को कमजोर करने की किसी भी कोशिश को तुरंत नहीं रोका गया, तो इसका सीधा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पलायन और सामाजिक असमानता पर पड़ेगा। उन्होंने मांग की कि केंद्र सरकार मनरेगा के लिए पर्याप्त बजट सुनिश्चित करे, समय पर मजदूरी भुगतान की गारंटी दे और राज्यों के अधिकारों का सम्मान करे।

प्रेस वार्ता में उपस्थित सुरजापुरी सामाजिक कार्यकर्ता एम. खुशनूद वलायत ने कहा कि मनरेगा के अंतर्गत केंद्र से मिलने वाला वित्तीय सहयोग राज्यों के लिए जीवनरेखा के समान है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार राज्यों पर वित्तीय दबाव बनाकर इस योजना को अप्रभावी करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने मांग की कि मनरेगा को राजनीतिक नजरिये से नहीं, बल्कि सामाजिक दायित्व के रूप में देखा जाए।

इस अवसर पर कांग्रेस नेता रोहिल आलम और मुन्तखब अंजुम ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा से सामाजिक न्याय, लोकतंत्र और संविधान प्रदत्त अधिकारों की पक्षधर रही है। उन्होंने कहा कि गरीबों और मजदूरों के अधिकारों के साथ किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में कहा कि मनरेगा जैसी योजनाओं को कमजोर करना देश के समावेशी विकास के विचार को ही कमजोर करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी ग्रामीण भारत की आवाज को सड़क से संसद तक मजबूती से उठाती रहेगी।

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