रामपुर: दो पैन कार्ड मामले में आजम खां को बड़ा झटका, एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट ने सजा बढ़ाकर की 10 वर्ष

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  • निचली अदालत के फैसले में आंशिक संशोधन: 7 साल की कैद अब 10 साल में तब्दील
  • जुर्माने की राशि में भारी बढ़ोतरी: 50 हजार रुपये से बढ़ाकर किया 5 लाख रुपये

रामपुर (अरमान ख़ान): समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आजम खां की कानूनी मुश्किलें और गहरा गई हैं। रामपुर की विशेष एमपी-एमएलए (सत्र) अदालत ने शनिवार को एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए, अब्दुल्ला आजम के दोहरे पैन कार्ड मामले में आजम खां की सजा को सात वर्ष से बढ़ाकर दस वर्ष कर दिया है। इसके साथ ही, अदालत ने आर्थिक दंड में भी दस गुना की बढ़ोतरी करते हुए 50 हजार रुपये के जुर्माने को बढ़ाकर पांच लाख रुपये कर दिया है।

क्या है मामला?

यह पूरा मामला साल 2019 का है, जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के स्थानीय विधायक आकाश सक्सेना ने 6 दिसंबर 2019 को रामपुर के सिविल लाइंस थाने में एक आपराधिक मुकदमा दर्ज कराया था।

शिकायत के मुताबिक, आजम खां के पुत्र अब्दुल्ला आजम ने कथित तौर पर अलग-अलग जन्मतिथियों के आधार पर दो पैन कार्ड (PAN Card) जारी करवाए थे।

  • एक सरकारी दस्तावेज में उनकी जन्मतिथि 1 जनवरी 1993 अंकित थी, जबकि दूसरे में 30 सितंबर 1990 दर्शाई गई थी।
  • अभियोजन पक्ष का आरोप था कि यह हेरफेर चुनाव लड़ने की अनिवार्य पात्रता और आयु सीमा की शर्तों को पूरा करने के उद्देश्य से, एक सोची-समझी साजिश के तहत किया गया था।

पुलिस ने इस मामले में गहन जांच के बाद आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467 (मूल्यवान सुरक्षा की जालसाजी), 468, 471 और 120बी (अवांछित आपराधिक साजिश) के तहत चार्जशीट दाखिल की थी।

निचली अदालत के फैसले के खिलाफ अपील पर आया निर्णय

एक लंबे और सघन विचारण (Trial) के बाद, रामपुर की ही विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने बीती 17 नवंबर 2025 को पिता-पुत्र (आजम खां और अब्दुल्ला आजम) को दोषी करार देते हुए सात-सात साल की कैद और 50-50 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी। इसके बाद दोनों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था। बाद में अपीलीय अदालत ने अप्रैल 2026 में इस सजा को बरकरार रखा था।

हालांकि, शिकायतकर्ता और भाजपा विधायक आकाश सक्सेना ने इस फैसले को नाकाफी बताते हुए एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट में एक पुनर्विचार याचिका (Appeal) दायर की थी, जिसमें अपराध की गंभीरता को देखते हुए अधिकतम सजा की मांग की गई थी।

सहायक शासकीय अधिवक्ता सीमा राणा ने कोर्ट परिसर में मीडिया को बताया कि अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों और साक्ष्यों का पुनर्मूल्यांकन करने के बाद शनिवार को अपना फैसला सुरक्षित से सार्वजनिक किया। कोर्ट ने माना कि यह कृत्य जन प्रतिनिधित्व के सिद्धांतों के खिलाफ था, जिसके आधार पर आजम खां की सजा और जुर्माने में यह बड़ी बढ़ोतरी की गई है।

‘यह फैसला कानून की सर्वोच्चता का प्रतीक’: आकाश सक्सेना

फैसले के वक्त अदालत कक्ष में मौजूद रहे भाजपा विधायक आकाश सक्सेना ने इस निर्णय को भारतीय न्यायपालिका की एक बड़ी नजीर बताया।

विधायक आकाश सक्सेना का आधिकारिक बयान:

“यह ऐतिहासिक फैसला देशभर के अपराधियों और सफेदपोशों के लिए एक कड़ा संदेश है। कोर्ट का यह आदेश कानून के शासन और न्यायपालिका की निष्पक्षता के प्रति जनता के विश्वास को और सुदृढ़ करता है। दो पैन कार्ड मामले में अदालत द्वारा सजा को 7 वर्ष से बढ़ाकर 10 वर्ष करना और जुर्माना 5 लाख रुपये करना यह सिद्ध करता है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून से ऊपर कोई नहीं हो सकता। यह उन लोगों के लिए एक बड़ी सीख है जो निजी राजनैतिक स्वार्थों के लिए संवैधानिक मर्यादाओं और नियमों का उल्लंघन करते हैं।”

राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले के बाद आजम खां के विधायी और राजनैतिक भविष्य की राहें और अधिक कठिन हो सकती हैं। डिफेंस काउंसिल (बचाव पक्ष) के सूत्रों के मुताबिक, इस फैसले के खिलाफ अब उच्च न्यायालय (High Court) का रुख करने की तैयारी की जा रही है।

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