रामपुर(रिजवान ख़ान): समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता आजम खान को रामपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। साल 2019 के एक भड़काऊ भाषण मामले में अदालत ने आजम खान को कानून की चार अलग-अलग धाराओं के तहत दो-दो साल की सजा सुनाई है। साथ ही, प्रत्येक धारा में 5 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। अदालत के इस ऐतिहासिक फैसले पर अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है।
‘जनता की तालियां बटोरने वाले नेताओं के लिए सबक’ — आकाश सक्सेना
अदालत के इस फैसले का स्वागत करते हुए रामपुर से बीजेपी विधायक आकाश सक्सेना ने इसे एक नजीर बताया। उन्होंने कहा:
“यह फैसला उन नेताओं के लिए एक बड़ा सबक है जो केवल जनता की तालियां बटोरने के लिए सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ अपमानजनक और अमर्यादित टिप्पणियां करते हैं। ऐसे नेता अक्सर यह भूल जाते हैं कि जो मानदंड वे दूसरों पर लागू करते हैं, वही कानून उन पर भी लागू होता है। अदालत का यह फैसला अपने आप में ऐतिहासिक है।”
क्या है पूरा मामला?
यह मामला साल 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान का है। एडवोकेट स्वदेश शर्मा और एडवोकेट संदीप सक्सेना के मुताबिक, उस समय रामपुर में चुनाव आचार संहिता लागू थी। आजम खान ने एक चुनावी रैली के दौरान जिला प्रशासन और सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक, भड़काऊ और अपमानजनक टिप्पणियां की थीं।
इस मामले में अहम बातें इस प्रकार हैं:
- लिखित माफी के बाद भी दिया भाषण: वकीलों के अनुसार, इस घटना से पहले भी आजम खान पर चुनाव आयोग द्वारा 48 घंटे और 72 घंटे के प्रतिबंध लगाए जा चुके थे। उन्होंने लिखित में माफी भी मांगी थी, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने दोबारा वही आचरण दोहराया, जिसके बाद सिविल लाइंस थाने में मामला दर्ज किया गया।
- ठोस डिजिटल सबूत: मामले की जांच अधिकारी ऋषिपाल सिंह ने की और अदालत में चार्जशीट दाखिल की। अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 8 सरकारी कर्मचारियों को गवाह के रूप में पेश किया गया, जिन्होंने प्रत्यक्षदर्शी के तौर पर बयान दिए।
- वीडियो साक्ष्य बने आधार: इस मामले में सबसे मजबूत कड़ी वीडियो फुटेज थी। आरोपी पक्ष (आजम खान के वकीलों) ने अदालत में इस वीडियो साक्ष्य की सत्यता को कभी चुनौती नहीं दी। इसी ठोस सबूत और गवाहों के आधार पर कोर्ट ने उन्हें दोषी करार दिया।
कोर्ट ने सुनाई 2 साल के साधारण कारावास की सजा
एमपी/एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आजम खान को कानून की चार संबंधित धाराओं के तहत दोषी माना। अदालत ने सभी चारों धाराओं में दो-दो साल के साधारण कारावास और 5-5 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को आजम खान के लिए एक और बड़ा कानूनी झटका माना जा रहा है, जबकि बीजेपी इसे कानून के राज और प्रशासनिक गरिमा की जीत के रूप में देख रही है।
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