पीठ ने आयोग से पूछा,’आप उन लोगों के नाम क्यों नहीं बता सकते, जिनकी मौत हो गई है या जो लोग पलायन कर दूसरे निर्वाचन क्षेत्रों में चले गए हैं।’
नई दिल्ली: बिहार एसआईआर पर चुनाव आयोग को बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटाए गए 65 लाख लाख नामों की सूची सार्वजनिक करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि चुनाव आयोग को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटाए गए 65 लाख वोटर्स की पहचान 19 अगस्त तक सार्वजनिक करनी होगी। अदालत ने आयोग को 22 अगस्त तक अनुपालन रिपोर्ट सौंपने का आदेश भी दिया है।
अदालत ने यह भी आदेश दिया है कि वेबसाइट पर सर्च किए जाने वाले फॉर्मेट में मतदाता सूची को उपलब्ध कराया जाए। चुनाव आयोग पहले ऐसा करने को राजी नहीं था, लेकिन अदालत के आदेश के बाद आयोग ने इस पर सहमति जताई।
Supreme Court directs Election Commission of India to publish the entire list of 65 lakh deleted names on the website and also in front of BLO offices. Advertisements also in local newspapers stating that people can check the same. Aadhaar to be accepted as a document, clarifies… https://t.co/6uGWGbY4Fu
— Bar and Bench (@barandbench) August 14, 2025
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने इस मामले पर आज गुरुवार को सुनवाई की। पीठ ने आयोग से पूछा,’आप उन लोगों के नाम क्यों नहीं बता सकते, जिनकी मौत हो गई है या जो लोग पलायन कर दूसरे निर्वाचन क्षेत्रों में चले गए हैं।’
सुप्रीम कोर्ट का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने चुनाव आयोग से कहा कि इन (65 लाख) नामों को डिस्प्ले बोर्ड या वेबसाइट पर डाला जाए, ताकि जिन लोगों को भी दिक्कत है वे 30 दिन के अंदर सुधार के लिए उपाय कर सकें। सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने पीठ के सामने SIR को लेकर अपना पक्ष भी रखा। EC ने कहा कि राजनीतिक विद्वेष के माहौल में काम करते हुए, शायद ही कोई ऐसा फैसला हो जिस पर विवाद न हुआ हो। आयोग ने अदालत से कहा कि वह राजनीतिक दलों के बीच संघर्ष में फंसा हुआ है, क्योंकि यदि कोई पार्टी जीतती है तो उसके लिए ईवीएम अच्छी है, अगर वे हारते हैं तो ईवीएम खराब हो जाती है।
चुनाव आयोग ने कहा कि बिहार में मोटे तौर पर अनुमान के मुताबिक लगभग 6.5 करोड़ लोगों को एसआईआर के लिए कोई दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता नहीं पड़ी। राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं को मृत, पलायन कर चुके या दूसरे स्थानों पर चले गये लोगों के नामों की सूची दी गई है। चुनाव आयोग के इस जवाब पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम नहीं चाहते कि नागरिकों के अधिकार राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं पर निर्भर रहें। मृत, पलायन कर चुके या दूसरे स्थानों पर चले गये मतदाताओं के नामों को डिस्प्ले बोर्ड या वेबसाइट पर प्रदर्शित करने से अनजाने में हुई त्रुटियों को सुधारने का मौका मिलेगा।
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