नई दिल्ली: फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट, ओखला के डॉक्टरों ने चिकित्सा जगत में एक मिसाल पेश करते हुए जन्म के मात्र 40 मिनट बाद एक नवजात शिशु की सफल ‘मिनीमली इनवेसिव’ कार्डियाक सर्जरी की है। गंभीर जन्मजात हृदय रोग से जूझ रहे इस शिशु के दिल की मांसपेशियां बेहद कमजोर थीं और वाल्व खतरनाक रूप से संकरा था।
निराशा के बीच उम्मीद की किरण
इस संघर्ष की शुरुआत प्रेग्नेंसी के 30वें सप्ताह में हुई, जब एक अल्ट्रासाउंड जांच में पता चला कि भ्रूण के हृदय का एक वाल्व (Aortic Valve) गंभीर रूप से संकरा है और हृदय के आसपास तरल पदार्थ जमा हो गया है। माता-पिता के लिए यह खबर किसी सदमे से कम नहीं थी, लेकिन फोर्टिस ओखला के पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी विभाग के डायरेक्टर डॉ. नीरज अवस्थी और उनकी टीम ने इस चुनौती को स्वीकार किया।
‘गोल्डन आवर’ में सटीक उपचार
शिशु का जन्म प्रेग्नेंसी के 31वें सप्ताह में सिजेरियन सेक्शन के जरिए एक अन्य अस्पताल में हुआ। जन्म के तुरंत बाद (15 मिनट के भीतर) फोर्टिस की विशेषज्ञ टीम ने उसे अपनी देखरेख में लिया।
- चुनौती: शिशु का दिल मुश्किल से धड़क रहा था।
- प्रक्रिया: जन्म के 40वें मिनट में ‘बैलून एओर्टिक वोल्वोटॉमी’ (Balloon Aortic Valvotomy) शुरू की गई।
- तकनीक: एडवांस अल्ट्रासाउंड-गाइडेड वास्क्युलर एक्सेस की मदद से बिना किसी बड़े चीरे के संकुचित वाल्व को खोल दिया गया।
सर्जरी के तत्काल बाद किए गए इकोकार्डियोग्राफी में सकारात्मक परिणाम दिखे—शिशु के हृदय का फंक्शन सामान्य होने लगा और वाल्व पूरी तरह खुल गया।
विशेषज्ञों की राय
मामले पर जानकारी देते हुए डॉ. नीरज अवस्थी ने कहा:
“यह हमारे करियर के सबसे चुनौतीपूर्ण मामलों में से था। हृदय की मांसपेशियां क्षतिग्रस्त थीं और फ्लूइड ओवरलोड भी था। हमारी सफलता की कुंजी ‘गोल्डन आवर’ (जन्म के तुरंत बाद का पहला घंटा) में त्वरित निर्णय और विभिन्न विभागों के बीच बेहतरीन तालमेल रही।”
डॉ. विक्रम अग्रवाल (फेसिलिटी डायरेक्टर, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स) ने टीम की सराहना करते हुए कहा कि यह मामला अत्याधुनिक तकनीक और डॉक्टरों के अटूट विश्वास का परिणाम है।
नया जीवन, नई उम्मीद
समय से पहले जन्मे (Premature) इस बच्चे को कुछ दिन नियोनल नर्सरी में रखा गया, जहाँ उसकी रिकवरी और वजन पर ध्यान दिया गया। अब शिशु पूरी तरह स्वस्थ है और उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। भावुक माता-पिता ने डॉक्टरों का आभार व्यक्त करते हुए इसे अपने बच्चे के लिए ‘जिंदगी का अमूल्य उपहार’ बताया।
मुख्य बिंदु:
- बीमारी: गंभीर एओर्टिक स्टेनोसिस (हृदय वाल्व का संकरा होना)।
- सर्जरी का समय: जन्म के मात्र 40 मिनट बाद।
- तकनीक: मिनीमली इनवेसिव (Minimal Invasive) बैलून वोल्वोटॉमी।
- परिणाम: हृदय की कार्यक्षमता पूरी तरह बहाल, शिशु स्वस्थ।
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