देश में पैर पसार रहा है स्वाइन फ्लू: कर्नाटक में 41 वर्षीय व्यक्ति की मौत, अकेले छत्तीसगढ़ में 3 ने गंवाई जान; जरूर जान लें ये 6 लक्षण

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नई दिल्ली / बेंगलुरु: देश में कोरोना के बाद अब स्वाइन फ्लू (H1N1) का खतरा तेजी से मंडराने लगा है। सोमवार को कर्नाटक में स्वाइन फ्लू से एक 41 वर्षीय व्यक्ति की मौत का मामला सामने आया है। ‘द हिंदू’ की रिपोर्ट के मुताबिक, संक्रमित होने के बाद मरीज का इलाज एक निजी अस्पताल में चल रहा था, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया।

भारत में पिछले तीन हफ्तों के भीतर स्वाइन फ्लू से यह चौथी मौत है। कर्नाटक से पहले छत्तीसगढ़ में भी इस खतरनाक वायरस के कारण तीन लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में स्वाइन फ्लू का कहर, आंकड़ा 100 के पार

आकाशवाणी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, छत्तीसगढ़ का बिलासपुर जिला इस समय स्वाइन फ्लू का हॉटस्पॉट बनता जा रहा है। करीब दो हफ्ते पहले बिलासपुर में एक और मरीज की मौत के बाद, अकेले इस जिले में मरने वालों की संख्या बढ़कर 3 हो गई है। वहीं, बिलासपुर में स्वाइन फ्लू से संक्रमित मरीजों का आंकड़ा 100 के करीब पहुंच चुका है, जिसने स्वास्थ्य विभाग की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

क्या है स्वाइन फ्लू (H1N1) और यह कैसे फैलता है?

क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार: स्वाइन फ्लू (H1N1) श्वसन तंत्र (Respiratory System) से जुड़ा एक अत्यधिक संक्रामक रोग है, जो ‘इन्फ्लूएंजा ए’ वायरस के एक खास स्ट्रेन (H1N1) के कारण होता है।

इसे ‘स्वाइन फ्लू’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसका वायरस सूअरों में पाए जाने वाले इन्फ्लूएंजा वायरस से काफी मिलता-जुलता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, यह वायरस सूअरों के जरिए फैलता है। जब कोई इंसान इनके संपर्क में आता है, तो वायरस उसके शरीर में प्रवेश कर जाता है। इसके बाद, संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या संपर्क में आने से यह एक स्वस्थ इंसान से दूसरे इंसान में तेजी से फैलने लगता है।

स्वाइन फ्लू (H1N1) के 6 मुख्य लक्षण

अगर आपको या आपके परिवार में किसी को नीचे दिए गए लक्षण दिख रहे हैं, तो इन्हें साधारण फ्लू समझकर नजरअंदाज न करें:

  • 1. तेज बुखार आना और अचानक ठंड लगना।
  • 2. लगातार खांसी और गले में गंभीर खराश होना।
  • 3. शरीर और मांसपेशियों में तेज दर्द।
  • 4. गंभीर सिरदर्द और हर वक्त अत्यधिक थकान महसूस होना।
  • 5. नाक का लगातार बहना या बंद हो जाना।
  • 6. उल्टी और दस्त होना (यह लक्षण विशेषकर बच्चों में ज्यादा देखा जाता है)।

नोट: समय पर जांच और सही इलाज मिलने से स्वाइन फ्लू पूरी तरह ठीक हो सकता है और जान का खतरा टल जाता है। इलाज में देरी संक्रमण को फेफड़ों तक पहुंचा सकती है।

बचाव के अचूक उपाय: खुद को ऐसे रखें सुरक्षित

स्वाइन फ्लू से सुरक्षित रहने के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कुछ जरूरी गाइडलाइंस जारी की हैं:

1. सालाना फ्लू वैक्सीन (टीकाकरण)

स्वाइन फ्लू से बचने का सबसे प्रभावी और सुरक्षित तरीका सालाना फ्लू का टीका (Flu Shot) लगवाना है। डॉक्टर की सलाह पर हर साल यह टीका लगवाकर आप खुद को सुरक्षित रख सकते हैं।

2. पर्सनल हाइजीन (व्यक्तिगत स्वच्छता) का ध्यान रखें

  • अपने हाथों को बार-बार साबुन और पानी से कम से कम 20 सेकंड तक अच्छी तरह धोएं।
  • खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को टिशू पेपर या अपनी कोहनी से ढकें।
  • इस्तेमाल किए गए टिशू को तुरंत डस्टबिन में फेंकें।

3. सामाजिक दूरी है जरूरी

अगर आसपास कोई व्यक्ति बीमार है, खांस या छींक रहा है, तो उससे उचित दूरी बनाए रखें। भीड़भाड़ वाले इलाकों में मास्क का उपयोग करना एक बेहतर विकल्प हो सकता है।

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