डॉ. माजिद अहमद तालिकोटी: कैंसर के अंधेरे में उम्मीद की किरण, भारत के उन ‘हीरो’ डॉक्टरों में शुमार

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नई दिल्ली: चिकित्सा जगत में कुछ नाम ऐसे होते हैं जो केवल अपनी डिग्रियों या पदों से नहीं, बल्कि अपनी निस्वार्थ सेवा और मानवता के प्रति समर्पण से पहचान बनाते हैं। ऐसे ही एक प्रेरणादायक चेहरा हैं—डॉ. माजिद अहमद तालिकोटी। डॉ. माजिद को प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान ‘इंडिया टुडे ग्रुप’ ने अपनी 50वीं वर्षगांठ के विशेष संस्करण में डॉ. तालिकोटी के अनुकरणीय जीवन और कैंसर देखभाल में उनके क्रांतिकारी योगदान को प्रमुखता से स्थान दिया है, जो उनकी उपलब्धियों का सबसे बड़ा प्रमाण है।

एक संघर्षशील शुरुआत से ‘एशिया के टॉप कैंसर सर्जन’ तक का सफर

कर्नाटक के शोरापुर नामक एक छोटे से गांव में जन्मे डॉ. माजिद का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। उनके पिता खालिद अहमद ने हमेशा उन्हें ऊंचे सपने देखने और मानवता की सेवा करने के लिए प्रेरित किया। यही प्रेरणा उन्हें आज भारत के शीर्ष सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्टों में खड़ा करती है।

शिक्षा: उन्होंने अपनी मेडिकल शिक्षा (MBBS और MS) RGUHS से पूरी की।

विशेषज्ञता: देश के सर्वश्रेष्ठ संस्थान अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS, नई दिल्ली) के IRCH से सर्जिकल ऑन्कोलॉजी में विशेषज्ञता हासिल की।

अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण: एशिया के प्रतिष्ठित नेशनल कैंसर सेंटर, जापान से भी प्रशिक्षण प्राप्त किया।

“मेडिकल कॉलेज के दिनों में, मैं उन कैंसर रोगियों से मिला जो यह मान चुके थे कि जीवन समाप्त हो गया है। उस निराशा ने मुझे झकझोर दिया… मुझे पता था कि मुझे यहीं होना है।”डॉ. माजिद अहमद तालिकोटी

बोकारो में मील का पत्थर: 600 बिस्तरों वाला ‘मेडिकेंट अस्पताल’

डॉ. तालिकोटी की सेवाएं केवल दिल्ली-एनसीआर तक सीमित नहीं हैं। वे उत्तरी रेलवे सेंट्रल अस्पताल के अलावा मूलचंद अस्पताल और बत्रा अस्पताल में सर्जिकल ऑन्कोलॉजी के निदेशक के रूप में कार्यरत हैं। लेकिन उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि झारखंड के बोकारो में मेडिकेंट अस्पताल और अनुसंधान केंद्र की स्थापना है।batrahospitaldelhi+1

600 बिस्तरों वाले इस विशाल संस्थान ने झारखंड, बिहार, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के हजारों मरीजों के लिए उम्मीद की नई किरण जगाई है, जिनके लिए महंगे कैंसर इलाज का सपना अधूरा रह जाता था। इसके अलावा, वे श्रीनगर (फ्लोरेंस अस्पताल) और गुलबर्गा (सनराइज अस्पताल) में भी नियमित रूप से मरीजों की देखभाल करते हैं।medicaldialogues+1

आंकड़ों में देखें डॉ. माजिद का अनोखा योगदान

डॉ. तालिकोटी का करियर आंकड़ों से परे एक मिसाल है। उन्होंने अब तक 20,000 से अधिक सफल कैंसर सर्जरी की हैं और 3 लाख से अधिक मरीजों का इलाज किया है।linkedin+1

उपलब्धिविवरण
सर्जरी अनुभव20,000+ सफल कैंसर सर्जरी
अंतर्राष्ट्रीय पहचान‘एशिया के टॉप कैंसर सर्जन’ और ‘Best Cancer Specialist of the Year (Asia)’ से सम्मानित medicaldialogues+1
सामाजिक कार्यहजारों जरूरतमंद मरीजों की मुफ्त सर्जरी
जागरूकता150+ कैंसर जागरूकता वार्ता और 500+ मेडिकल कैंप का आयोजन
सरकारी योजनाएंआयुष्मान भारत योजना के सशक्त समर्थक और क्रियान्वयनकर्ता

हाल ही में उन्हें इंडिया-GCC ट्रेड काउंसिल द्वारा ‘ऑनरेरी हेल्थ कमिश्नर’ नियुक्त किया गया है, जो उनके काम का अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लोहा मनवाने जैसा है।medicaldialogues+1

चिकित्सा से परे: सामाजिक सरोकार और शिक्षा का प्रेम

डॉ. माजिद का मानना है कि कैंसर का इलाज केवल दवाइयों से नहीं, बल्कि समाज की सोच बदलने से होता है। वे कहते हैं, “जितना अधिक हम खुलकर बात करेंगे, उतना ही डर कम होगा। कैंसर अगर शुरुआती दौर में पकड़ा जाए तो यह पूरी तरह ठीक हो सकता है।”

स्वास्थ्य के क्षेत्र में अथक सेवा के साथ-साथ, डॉ. तालिकोटी शिक्षा के भी प्रबल समर्थक हैं। वे दिल्ली के दरियागंज क्षेत्र में वंचित बच्चों के लिए चार स्कूल चलाने में सक्रिय योगदान देते हैं, क्योंकि उनका विश्वास है कि शिक्षा ही बेहतर भविष्य की नींव है।

पारिवारिक जीवन: व्यस्तता के बीच सादगी

एक व्यस्त और मांग वाले पेशे में होने के बावजूद, डॉ. माजिद एक समर्पित पति और पिता हैं। उनकी पत्नी प्रो. (डॉ.) जहां आरा बांडे और उनके दो बच्चे उनकी ताकत का केंद्र हैं। वे अपने टाइमटेबल से समय निकालकर परिवार को देते हैं, जो उन्हें हमेशा जमीन से जोड़े रखता है।

निष्कर्ष: एक सच्चे ‘हीरो’ की कहानी

डॉ. माजिद अहमद तालिकोटी के लिए चिकित्सा पेशा केवल रोटी-रोजी का जरिया नहीं, बल्कि जीवन जीने का एक तरीका है। उनकी संवेदनशीलता, आधुनिक तकनीक का गहन ज्ञान और गरीबों के प्रति दयाभाव उन्हें वर्तमान समय का एक सच्चा नायक बनाता है। इंडिया टुडे द्वारा उनके काम को मिली यह मान्यता न केवल उनके लिए, बल्कि पूरे भारतीय चिकित्सा जगत के लिए गर्व का विषय है।

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