अगरतला, 19 फरवरी 2026: त्रिपुरा की राजधानी अगरतला आज राजभाषा हिंदी और भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धति ‘आयुर्वेद’ के गौरवशाली मिलन की साक्षी बन रही है। गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग द्वारा आयोजित अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन का भव्य शुभारंभ हपानिया स्थित अंतर्राष्ट्रीय इंडोर प्रदर्शनी केंद्र में हुआ।
मुख्य अतिथि और विशिष्ट उपस्थिति
सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह उपस्थित रहे। उनके साथ विभिन्न मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी, गणमान्य नागरिक और राजभाषा के क्षेत्र में काम करने वाले विद्वान शामिल हुए। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य राजभाषा हिंदी के प्रभावी क्रियान्वयन को बढ़ावा देना और प्रशासनिक कार्यों में इसके प्रयोग को प्रोत्साहित करना है।
आयुर्वेद और ‘फिट इंडिया’ का संदेश
इस वर्ष सम्मेलन का विशेष आकर्षण आयुष मंत्रालय के अंतर्गत अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA) की सक्रिय भागीदारी रही। प्रधानमंत्री के ‘फिट इंडिया मूवमेंट’ से प्रेरणा लेते हुए, राजभाषा विभाग की सचिव श्रीमती अंशुली आर्या ने आयुष शिविर और योग सत्रों का समन्वय किया।
संस्थान की प्रमुख गतिविधियां:
- निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर: संस्थान के निदेशक प्रो. (वैद्य) प्रदीप कुमार प्रजापति के नेतृत्व में दिल्ली से आए विशेषज्ञ डॉक्टरों ने आगंतुकों का स्वास्थ्य परीक्षण किया।
- नित्यसेवी आयुर किट: देशभर से आए प्रतिभागियों को दैनिक स्वास्थ्य संरक्षण के लिए विशेष आयुर्वेदिक किट वितरित की गई।
- विशेष तकनीक: शिविर में प्रकृति परीक्षण और नाड़ी परीक्षण के माध्यम से लोगों को उनके शरीर की प्रकृति के अनुसार स्वास्थ्य परामर्श दिया गया।
गृह मंत्री ने किया पुस्तक “प्रमेह योग संग्रह” का विमोचन
सम्मेलन के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने प्रो. (वैद्य) राजाराम महतो द्वारा लिखित और संपादित पुस्तक “प्रमेह योग संग्रह” का विमोचन किया। यह पुस्तक मधुमेह (Diabetes) के आयुर्वेदिक प्रबंधन और पारंपरिक उपचारों पर केंद्रित है, जो आधुनिक जीवनशैली में अत्यंत प्रासंगिक है।
विशेषज्ञों की सहभागिता
अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA) की ओर से डीन प्रो. (डॉ.) महेश व्यास, एम.एस. योगेश बड़वे और डॉ. रमाकांत यादव सहित कई वरिष्ठ चिकित्सकों ने अपनी सेवाएं प्रदान कीं। संस्थान के विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य परिचर्चा और हिंदी प्रदर्शनी में भी हिस्सा लिया।
निदेशक प्रो. (वैद्य) प्रदीप कुमार प्रजापति का कथन: “राजभाषा सम्मेलन जैसे राष्ट्रीय मंच पर आयुर्वेद की सहभागिता गर्व का विषय है। हमारा उद्देश्य केवल उपचार नहीं, बल्कि जनसामान्य को आयुर्वेदिक जीवनशैली के प्रति जागरूक करना है। हम राजभाषा संवर्धन के साथ ‘स्वस्थ भारत’ के संकल्प को सुदृढ़ कर रहे हैं।”
यह सम्मेलन न केवल हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार का माध्यम बना, बल्कि इसने प्रशासनिक उत्कृष्टता और पारंपरिक चिकित्सा पद्धति के सफल समागम को भी प्रदर्शित किया। अगरतला में आयोजित यह कार्यक्रम ‘स्वस्थ भारत, समर्थ भारत’ की दिशा में एक बड़ा कदम सिद्ध हुआ है।
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