मुंबई, महाराष्ट्र: देश में समानता, न्याय और भाईचारे की नई अलख जगाने के लिए आज “हम भारत के लोग” नाम से एक अहम बैठक का आयोजन धुले में किया गया। इस बैठक की अगुवाई महात्मा गांधी के पौत्र श्री तुषार गांधी ने की। इसमें देशभर के कई धर्मनिरपेक्ष संगठनों और समाज के सभी तबकों के लोगों ने भाग लिया।
बैठक का मकसद भारत के संविधान में निहित मूल्यों—समानता, न्याय और बंधुत्व—को मजबूती देना था। वक्ताओं ने कहा कि आज जब देश में नफ़रत और भेदभाव की दीवारें खड़ी की जा रही हैं, तब गांधी, बाबा साहब अंबेडकर और अब्दुल क़य्यूम अंसारी जैसे नेताओं के रास्ते पर चलना हमारी सबसे बड़ी ज़रूरत बन गई है।

श्री तुषार गांधी ने कहा, “हमारा संविधान ही हमारी असली ताकत है। इस देश में हर नागरिक को बराबरी का हक़ है—धर्म, जाति या ज़ात-पात के नाम पर कोई भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
इस मौके पर पसमांदा समाज के आरक्षण और हक़ों को लेकर भी आवाज़ बुलंद हुई। वक्ताओं ने कहा कि समाज के कमजोर तबकों को उनके संवैधानिक अधिकार दिलाना ही सच्चा राष्ट्रवाद है।
बैठक में श्री शकील शाहीन (अध्यक्ष AIMC धुले), श्री मुशीर अंसारी, श्री फिरोज मिठी बोरवाला, भारत स्वराज के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री इरफ़ान जामियावाला, श्री विलास जी समेत कई अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों ने भाग लिया। सभी ने मिलकर एक धर्मनिरपेक्ष और न्यायप्रिय भारत के लिए काम करने का संकल्प लिया।
बैठक को ऐतिहासिक बताते हुए श्री शकील शाहीन ने कहा कि यह आंदोलन अब महाराष्ट्र से निकलकर पूरे देश में फैलेगा और हर नागरिक के हक़ की लड़ाई लड़ेगा।
“हम भारत के लोग” सिर्फ एक आंदोलन नहीं, बल्कि संविधान और इंसानियत की रक्षा का संकल्प है—जिसमें देश की विविधता को ही उसकी असली ताकत माना जाएगा।
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