नई दिल्ली | 4 फरवरी 2026: देश में अल्पसंख्यक समुदायों के धार्मिक स्थलों पर बढ़ते हमलों, अवैध तोड़फोड़ और प्रशासनिक ज्यादतियों के खिलाफ अब एक बड़ा मोर्चा खुल गया है। इंडियन मुस्लिम्स फॉर सिविल राइट्स (IMCR) और एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स (APCR) ने मंगलवार को नई दिल्ली में एक संयुक्त बैठक कर संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए देशव्यापी कानूनी और जनआंदोलन की घोषणा की है।
पूर्व मुख्य न्यायाधीश और दिग्गज नेताओं की उपस्थिति
पटना उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति इक़बाल अहमद अंसारी की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में देश की कई प्रमुख हस्तियों ने शिरकत की। इनमें पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग, सांसद संजय सिंह (AAP), आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी (NC), मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी (SP), और वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े शामिल थे।
“खामोशी अब विकल्प नहीं”: मोहम्मद अदीब
IMCR के अध्यक्ष मोहम्मद अदीब ने बढ़ते नफरती माहौल पर चिंता जताते हुए कहा, “मस्जिदों और चर्चों पर लगातार हो रहे हमले और प्रशासन की चुप्पी शर्मनाक है। संवैधानिक मूल्यों को योजनाबद्ध तरीके से खत्म किया जा रहा है। अब चुप रहना कोई विकल्प नहीं है।”
प्रमुख वक्ताओं के मुख्य बिंदु:
- नजीब जंग (पूर्व LG): उन्होंने आपसी गलतफहमियां दूर करने के लिए मस्जिदों और मदरसों के दरवाजे अन्य धर्मों के लोगों के लिए खोलने का सुझाव दिया।
- संजय सिंह (सांसद, AAP): उन्होंने कहा कि अन्याय किसी एक धर्म तक सीमित नहीं है, यह सभी हाशिए पर पड़े वर्गों पर हमला है।
- आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी (सांसद, NC): उन्होंने उत्तराखंड में कश्मीरी युवाओं के उत्पीड़न को अस्वीकार्य बताया और जमीनी संघर्ष पर जोर दिया।
2,500 मस्जिदों पर खतरे का साया: विशेषज्ञों की चेतावनी
बैठक में विशेषज्ञों ने चौंकाने वाला दावा किया कि देशभर में लगभग 2,500 मस्जिदों को निशाना बनाने की कोशिशें की जा रही हैं। ‘बुलडोजर संस्कृति’ और विकास के नाम पर ईदगाहों, कब्रिस्तानों और मदरसों की जमीनों के अधिग्रहण को अल्पसंख्यकों के धार्मिक अस्तित्व पर प्रहार बताया गया।
वक्ताओं ने पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 की याद दिलाते हुए कहा कि कानून के बावजूद धार्मिक स्थलों के स्वरूप को बदलने की कोशिशें जारी हैं, जो संविधान का खुला उल्लंघन है।
सिख समुदाय का सम्मान और सांप्रदायिक सौहार्द
बैठक में सिख और ईसाई समुदायों के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया। सिख नेताओं ने गुरुग्राम की घटना को याद किया, जहाँ मस्जिदों के बंद होने पर गुरुद्वारों के दरवाजे नमाज के लिए खोल दिए गए थे। इस कार्यक्रम में सांप्रदायिक सौहार्द को बढ़ावा देने वाले सिख सदस्यों को सम्मानित भी किया गया।
बैठक में पारित महत्वपूर्ण प्रस्ताव (Action Plan):
संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए बैठक में निम्नलिखित रणनीतियों पर सहमति बनी:
- लीगल डिफेंस फंड: अल्पसंख्यक पूजा स्थलों की सुरक्षा के लिए एक मजबूत कानूनी टीम और रक्षा कोष का गठन।
- ट्रेनिंग प्रोग्राम: मस्जिद कमेटियों को कानूनी और प्रशासनिक नोटिसों से निपटने का प्रशिक्षण देना।
- वक्फ बोर्ड की रक्षा: वक्फ बोर्डों में बढ़ते राजनीतिक हस्तक्षेप के खिलाफ संगठित आवाज उठाना।
- त्वरित सहायता: अवैध तोड़फोड़ के पीड़ितों को तत्काल कानूनी और मानवीय मदद मुहैया कराना।
- आंदोलन का विस्तार: इस संघर्ष को दिल्ली से निकाल कर ग्रामीण और प्रभावित क्षेत्रों तक ले जाना।
बैठक के अंत में मोहम्मद अदीब ने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई कानून और संविधान के दायरे में रहकर लड़ी जाएगी। अल्पसंख्यकों के धार्मिक अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुटता ही एकमात्र रास्ता है।
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