अमेरिकी सांसदों का भारत सरकार को पत्र: उमर खालिद की रिहाई और मुस्लिम कार्यकर्ताओं की हिरासत पर चिंता

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नई दिल्ली: अमेरिकी कांग्रेस के आठ सदस्यों ने भारत सरकार को एक पत्र लिखकर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के पूर्व छात्र उमर खालिद और अन्य मुस्लिम कार्यकर्ताओं की लंबी हिरासत पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। इस पहल का नेतृत्व प्रमुख डेमोक्रेटिक सांसद जेम्स पी. मैकगवर्न ने किया है, जो अमेरिकी संसद में मानवाधिकारों के मुद्दों पर सक्रिय रूप से आवाज उठाते रहे हैं।

पत्र में सांसदों ने उमर खालिद सहित कई अन्य मुस्लिम सामाजिक कार्यकर्ताओं को राष्ट्रीय सुरक्षा कानूनों के तहत लंबे समय से हिरासत में रखे जाने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने भारत सरकार से इन व्यक्तियों के मामलों की तत्काल समीक्षा करने और उचित कानूनी प्रक्रिया सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। यह पत्र भारत और अमेरिका के बीच मजबूत लोकतांत्रिक मूल्यों और कानून के शासन के साझा दृष्टिकोण के आधार पर लिखा गया है।

न्यूयॉर्क राज्य के विधायक ज़ोहरान ममदानी ने इस मुद्दे पर अपना समर्थन व्यक्त करते हुए एक व्यक्तिगत पत्र भी लिखा है, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। ममदानी ने अपने पत्र में उमर खालिद से कहा, “हम सब तुमको याद करतें हैं, तुम्हारे माता-पिता से मिलकर खुशी हुई।” यह संदेश उनके परिवार के प्रति सहानुभूति और एकजुटता को दर्शाता है। ममदानी के इस पत्र को ट्विटर और फेसबुक पर हजारों लोगों ने साझा किया है, जिससे यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक चर्चा में आ गया है।

उमर खालिद को दिल्ली हिंसा मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत सितंबर 2020 से हिरासत में रखा गया है। उनके समर्थकों का दावा है कि यह कार्रवाई राजनीतिक विरोधियों को चुप कराने के लिए की जा रही है, जबकि सरकारी अधिकारियों का कहना है कि यह कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है। अमेरिकी सांसदों के इस पत्र से भारत की न्यायिक प्रक्रिया और लोकतांत्रिक मूल्यों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं।

भारत सरकार की ओर से अभी इस पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि यह मामला विदेश मंत्रालय के संज्ञान में है। अमेरिकी सांसदों के इस कदम से दोनों देशों के बीच मानवाधिकारों को लेकर चल रही बहस और तनावपूर्ण हो सकती है, खासकर जब भारत अपनी आंतरिक मामलों में विदेशी हस्तक्षेप को लेकर संवेदनशील रहा है

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