सांसद कुँवर दानिश अली ने देश में रेलवे द्वारा गोदामों में कोयला तथा सीमेंट की लदाई के दौरान हो रहे प्रदूषण पर सवाल उठाये

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Globaltoday.in | उबैद इक़बाल

सांसद कुँवर दानिश अली(Danish Ali) ने देश में रेलवे द्वारा गोदामों में कोयला तथा सीमेंट की लदाई के दौरान हो रहे प्रदूषण के सन्दर्भ में अतारंकिक प्रश्न के माध्यम से सरकार के रेल, संचार एवं इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव से पूछा था कि:-
(1) क्या गोदामों में कोयला तथा सीमेंट की लदाई के दौरान प्रदूषण स्तर बहुत बढ़ जाता है जिससे निकटवर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बड़ी परेशानी होती है,
(2) यदि हां, तो तत्संबंधी ब्यौरा क्या है;
(3) क्या लोगों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने कोई कदम उठाए/उठा रही है;
(4) यदि हां, तो तत्संबंधी ब्यौरा क्या है; और
(5) यदि नहीं, तो इसके क्या कारण हैं?

दानिश अली द्वारा पूछे गए इन सवालों के जवाब में उत्तर में रेल, संचार एवं इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने सच्चाई से परे उत्तर देते हुए कहा कि रेलवे गोदामों में कोयला तथा सीमेंट की लदाई के दौरान प्रदूषण नहीं होता है। जबकि सभी जानते हैं कि वहां के निकटवर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को कितनी परेशानी होती है।

अश्विनी वैष्णव ने अपने उत्तर में कहा कि भारतीय रेलों ने 16.04.2018 को सभी क्षेत्रीय रेलों को साइडिंग और माल शेडों में प्रदूषण वाले पण्यों की सम्हलाई में प्रदूषण को कम करने के लिए विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए हैं जिनमें अन्य बातों के साथ-साथ शामिल हैं: –
i) राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एसपीसीबी) के प्रावधानों के अनुसार नई साइडिंग/मालशेड/निजी फ्रेट टर्मिनल/किसी भी लदान/उतराई पॉइंट के विकास निर्माण के लिए सहमति प्राप्त करना।
ii) अधिसूचित क्षेत्रों/वायु प्रदूषण नियंत्रण क्षेत्रों और औद्योगिक क्षेत्रों के वर्गीकरण को ध्यान में रखते हुए मौजूदा साइडिंगों के लिए राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रावधानों के अनुसार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से संचालन के लिए सहमति प्राप्त करना।
ii) क्षेत्रीय रेलें संबंधित एसपीसीबी द्वारा अधिसूचित वायु प्रदूषण नियंत्रण क्षेत्रों से अवगत रहें
और लागू पर्यावरण कानूनों का अनुपालन सुनिश्चित करें।
iv) वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण के अलावा, प्रदूषण की मात्रा और विशिष्ट पण्यों और स्थानों के लिए पर्यावरणीय प्रभाव को भी ध्यान में रखा जाए।
v) प्रत्येक लदान/उतराई पॉइंट पर पर्याप्त यातायात वहन क्षमता वाले पक्के पहुंच मार्गों का प्रावधान और मौजूदा सड़क की मरम्मत/रखरखाव जो खराब स्थिति में है।
vi) धूल प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए यंत्रीकृत प्रणाली या टैंकरों के माध्यम से जल छिड़काव प्रणाली।
vii) लदान/उतराई स्थल पर उपयुक्त हरित पट्टी कवर।
viii) जहां आवश्यक हो, भारी लदान व उतराई यातायात सम्हलाई पॉइंट्स पर पर्याप्त ऊंचाई के साथ परिसरों की परिधि के साथ इस्ट स्क्रीन दीवारों की व्यवस्था की जानी चाहिए।
ix) सभी प्रकार के फ्रेट टर्मिनलों अर्थात् माल शेडों, साइडिंगों (इंजन-ऑन-लोड सहित) और निजी फ्रेट टर्मिनल आदि पर फुटकर/थोक पण्यों के लदान के दौरान खुले माल डिब्बों को तिरपालों से ढकने के लिए प्रति रेक एक घंटे के अतिरिक्त खाली समय की अनुमति दी गई।

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