नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों की समस्या पर नाराजगी जताते हुए राज्यों को ‘एनिमल बर्थ कंट्रोल’ (ABC) नियमों का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि गंभीर रूप से बीमार और खतरनाक कुत्तों को मानवीय तरीके से मारने (Euthanasia) पर विचार किया जाना चाहिए। इसके साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने अपने पुराने आदेशों को बरकरार रखते हुए फिलहाल मामले की सुनवाई बंद कर दी है, लेकिन आगामी 17 नवंबर को सभी राज्यों की कंप्लायंस (अनुपालन) रिपोर्ट की समीक्षा करने की बात कही है।
कोर्ट ने जताई नाराजगी, कहा- ‘यह अदालती अवमानना’
मंगलवार को मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्यों ने कोर्ट के पिछले आदेशों का ठीक से पालन नहीं किया है, जिसे वह ‘अदालती अवमानना’ के तौर पर देखता है।
“राज्यों को एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) नियमों का पूरी तरह पालन करना चाहिए था, ताकि आज ऐसी स्थिति पैदा न होती। यह मामला सीधे तौर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य, सुरक्षा और पारिस्थितिक संतुलन (Ecological Balance) से जुड़ा है। हमारे 7 नवंबर, 2025 के आदेश की अनदेखी को अवमानना की तरह देखा जाएगा।” — सुप्रीम कोर्ट
अदालत ने आगे कहा कि बच्चों और बुजुर्गों को आवारा कुत्ते अपना शिकार बना रहे हैं और न्यायपालिका ऐसी गंभीर स्थिति से अपनी आंखें नहीं मूंद सकती। इसी के साथ कोर्ट ने एनिमल वेलफेयर बोर्ड के एसओपी (SOP) के खिलाफ दायर सभी आवेदनों को खारिज कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य निर्देश और गाइडलाइंस
अदालत ने अपने आदेश में सभी सार्वजनिक परिसरों से कुत्तों को बाहर रखने के पुराने फैसले को बरकरार रखा है और निम्नलिखित अहम निर्देश जारी किए हैं:
- ABC फ्रेमवर्क का पालन: सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) फ्रेमवर्क को सख्ती से लागू करें।
- स्थानीय केंद्रों की स्थापना: हर शहर में इसके लिए विशेष सेंटर बनाए जाएं।
- कर्मचारियों की ट्रेनिंग: संबंधित कर्मचारियों को उचित और वैज्ञानिक ट्रेनिंग दी जाए।
- वैक्सीनेशन: सभी प्रभावित क्षेत्रों में एंटी-रैबीज वैक्सीन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
- हाईवे से मवेशियों को हटाना: NHAI (भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) को निर्देश दिया गया है कि वे हाईवे से आवारा मवेशियों को हटाने के लिए कदम उठाएं और उन्हें नवनिर्मित गौशालाओं में भेजें।
- गंभीर मामलों में कड़ा रुख: अत्यधिक बीमार और खतरनाक हो चुके कुत्तों को कानूनन मारने पर विचार किया जाए।
- अधिकारियों को सुरक्षा: आदेशों का पालन करा रहे अधिकारियों के काम में बाधा न डाली जाए। उनके खिलाफ कोई भी अदालत केवल अपरिहार्य (बेहद जरूरी) स्थिति में ही सुनवाई करे।
डॉग बाइट के आंकड़ों पर चिंता
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने देशभर से सामने आए डॉग बाइट (कुत्तों के काटने) के चौंकाने वाले आंकड़ों का भी जिक्र किया। कोर्ट ने कहा:
- राजस्थान और तमिलनाडु: राजस्थान के गंगानगर, सीकर, उदयपुर और भीलवाड़ा समेत तमिलनाडु जैसे राज्यों से डॉग बाइट के डराने वाले आंकड़े मिले हैं।
- IGI एयरपोर्ट का मामला: दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल (IGI) एयरपोर्ट पर इस साल जनवरी से अब तक डॉग बाइट की 31 घटनाएं दर्ज हो चुकी हैं, जिनमें विदेशी पर्यटक भी शिकार हुए हैं।
- रैबीज से मौतें: देशभर में रैबीज के कारण हो रही मौतें बेहद चिंताजनक हैं।
अगली कार्रवाई: कोर्ट ने फिलहाल इस मामले की नियमित सुनवाई बंद कर दी है, लेकिन 17 नवंबर को सभी राज्यों द्वारा सौंपी जाने वाली कंप्लायंस रिपोर्ट के आधार पर आगे की समीक्षा की जाएगी।
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