एक युवक के कुत्ते के काटने पर तो किसी ने उसका इलाज नहीं कराया और ना ही उसे रेबीज का इंजेक्शन लगवाया लेकिन उसकी मौत हो जाने के बाद उसके संपर्क में आए लोगों में वहम के चलते छुआछूत की बीमारी मानते हुए कुत्ते के काटने के इंजेक्शन लगवाने की होड़ लग गई।
पुरानी कहावत है कि वहम का इलाज तो हकीम लुकमान के पास भी नहीं था। ऐसा अक्सर देखने को मिलता है कि जब लोग बीमारी का इलाज भले ही ना करें लेकिन वहम होने पर बुरी तरह इलाज पर टूट पड़ते हैं।
जनपद रामपुर(Rampur) के कस्बा कैमरी के एक युवक को 4 दिन पहले एक आवारा कुत्ते ने काट लिया था। लेकिन उसने अपना उपचार नहीं कराया जिसके बाद उसकी मौत हो गई।
युवक की मौत को लेकर लोगों में भ्रम फैल गया कि मृतक और उसके परिजनों के संपर्क में जो जो भी आया है वह भी अब ज़िंदा नहीं बचेगा। इस भय के चलते बिलासपुर के अस्पताल में अब तक 20 लोग रेबीज़ (Rabies Vaccine) का इंजेक्शन लगवा चुके हैं।
इंजेक्शन लगवाने वाले इन लोगों का तर्क है कि उनमें से किसी ने मृतक के पिता के साथ बीड़ी पी थी तो वहीं किसी ने उसके परिवार के साथ खाना खाया था या फिर किसी न किसी तरह से उनके संपर्क में आया था। बस इसी को लेकर लोगों में मौत का खौफ पनपने लगा और एक एक करके लगभग 20 लोग अस्पताल पहुंचकर रेबीज़ का इंजेक्शन लगवा चुके हैं।
यह हैरतअंगेज मामला जहां लोगों में चर्चा का विषय बना हुआ है वहीँ स्वास्थ्य महकमे के कर्मी भी बिना कुत्ता के काटे लोगों के रेबीज़ का इंजेक्शन लगवाए जाने को लेकर हैरानी में हैं।
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