गुलावठी (बुलंदशहर): भारतीय किसान यूनियन आज़ाद द्वारा SIR (पुनरीक्षण प्रक्रिया ) प्रक्रिया में आ रही परेशानियों को लेकर 26 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई से पहले ही कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने SIR प्रक्रिया की अंतिम तिथि 4 दिसंबर से बढ़ाकर 11 दिसंबर 2025 कर दी है, जिससे लाखों किसानों, मजदूरों और आम नागरिकों को राहत मिली है।
प्रेस वार्ता में यूनियन का रुख
मंगलवार को माननत गार्डन मैरिज हॉल, गुलावठी में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष (युवा) इंजीनियर शादाब चौधरी, राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी महराज राव, राष्ट्रीय महासचिव (युवा) ज़की गौहरी और प्रदेश सचिव चौधरी सलमान कुरैशी समेत सैकड़ों पदाधिकारी मौजूद रहे। यूनियन ने कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए इसे अपने कानूनी और जमीनी संघर्ष की जीत बताया।
तीन महीने की समय-सीमा की मांग
इंजीनियर शादाब चौधरी ने कहा, “यह फैसला किसानों और मजदूरों के लिए बड़ी राहत है, लेकिन हम मांग करते हैं कि SIR प्रक्रिया की समय-सीमा कम से कम 3 महीने तक बढ़ाई जाए, ताकि कोई भी परिवार हड़बड़ी और दबाव में न रहे।” उन्होंने सरकार से जमीनी हकीकत को समझते हुए पर्याप्त समय देने की अपील की।
BLO की मौत पर मुआवजे की मांग
राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी महराज राव ने SIR प्रक्रिया में अव्यवस्थाओं और भारी भीड़ के कारण पैदा हुई गंभीर स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि कई BLO और कर्मचारियों को असामान्य तनाव झेलना पड़ा। उन्होंने मांग की कि जिन BLO की काम के दबाव में मौत हुई है, उनके परिवारों को सरकार और चुनाव आयोग की ओर से उचित मुआवजा दिया जाए।
प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने का संकल्प
ज़की गौहरी ने कहा कि यह यूनियन की कानूनी और जमीनी मेहनत का सकारात्मक परिणाम है, लेकिन असल जीत तब होगी जब SIR प्रक्रिया आसान, पारदर्शी और जनता के अनुकूल बने। प्रदेश सचिव चौधरी सलमान कुरैशी ने इतनी बड़ी जनसंख्या वाले प्रदेश में सिर्फ एक हफ्ते की मोहलत को अपर्याप्त बताते हुए 3 महीने की समय-सीमा और प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग दोहराई।
भारतीय किसान यूनियन आज़ाद ने स्पष्ट किया कि संगठन किसानों और मजदूरों के अधिकारों की लड़ाई अदालत, सरकार और जमीन तीनों मोर्चों पर जारी रखेगा।
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