अब्दुल्लाह आजम ने बुधवार को रामपुर के समाजवादी पार्टी कार्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। इसी दौरान उन्होंने पिता आजम खान के साथ जेल में गुजारे गए 23 महीने का जिक्र भी किया।
पिता की तबीयत खराब होने के समय आईसीयू में भर्ती होने की बात सोच कर उनकी आंखों से आंसू छलक आए। अब्दुल्लाह आजम ने अपने रूंदे गले से इस सियासी लड़ाई को सीधे तौर पर सरकार से होना बताया। इसके अलावा वह अपने विरोधियों पर सियासी तीर छोड़ने से भी नहीं चूके।
अब्दुल्लाह आजम(Abdullah Azam) ने कहा कि जिम्मेदारी बहुत बड़ी है, मुकाबला बहुत बड़े लोगों से है मुकाबला बहुत बड़ी ताकत से है और वह ताकत सिर्फ सियासत की ताकत नहीं होगी वह ताकत सियासत की भी होगी, दौलत की भी होगी, ज्यादती की भी होगी, नाइंसाफी की भी होगी।
आज़ आजम खान का पैगाम
लेकिन उस ताकत का मुकाबला अपने मालिक पर यकीन रखते हुए और इत्मीनान के साथ उन तमाम मुश्किलात का सामना करना होगा और किसी भी मौके पर आजम खान साहब ने मुझे यह पैगाम दे कर भेजा था कि जब तमाम लोग पूरे जिले के जब आएं तो उन्हें सबसे पहले यह समझाएं कि मुखालिफ उनकी ताकत के सामने बहुत बड़ा है। यह बात आप भी जानते हैं यह वह जिला है एक रात में नारा लगा था वजीरे आजम बनाम आजम तब भी हम जीते थे।
नवाब खानदान पर तंज़
अब्दुल्लाह आजम कहा कि मैं जेल में था और मैं अखबार में पढ़ता था कि पता नहीं कितने हजार करोड़ की संपत्ति का बंटवारा हो रहा है। चुनाव निबट जाए फिर एक तहरीक चलाएंगे, दरखास्त करेंगे अदालत से यह जमीन, ये जायदाद खुद तो इन्होंने कमाई नहीं है। यह जमीन, यह तमाम जायदाद पर हक इस मुल्क की आवाम का है और यह तमाम जायदाद सरकार के सुपुत्र होना चाहिए और इस पर कोई काम तालीम का अगर सरकार करना चाहे तो करे, गरीबों को मकान देना चाहे तो दे लेकिन किसी ऐसे शख्स को इतनी बड़ी जायदाद नहीं मिलनी चाहिए जिसने माज़ी में भी उन लोगों का साथ दिया हो जिसने इस मुल्क को गुलाम बना कर रखा। वह तमाम लोग आज फिर आपके पीछे हैं। कुछ फिल्म लगता है स्वार में ठीक से पिट नहीं पाई है, स्वार में फिल्म अगर ठीक से फ्लॉप हो गई होती वैसे तो बहुत ही शानदार फ्लॉप हुई थी लेकिन अभी कुछ कसर बाकी है और जब दोनों सीटें एक साथ पीटेंगी तो दोनों फिल्में एक साथ फ्लॉप होंगी। कहते हैं ना फिल्म चल गई फिल्म पिट गई, पिछली बार वही दो थीं। इस बार दोनों की बलि तैयार है एक साथ की फिल्म रामपुर वाले ठीक से देखेंगे और एक साहब की तो बहुत ही ठीक से देखी जाएगी लेकिन मैं अभी भी आपको यह बता दूँ कि दूसरे वाले तो अभी सिनेमा हॉल को ही ढूंढ रहे हैं। उन्हें अभी यह भी नहीं पता है कि पिक्चर चलानी कहां है।
लड़ाई सरकार से
अब्दुल्लाह आजम के मुताबिक अगर किसी अपने ने खुदा ना करे गुस्से में आ गए हो कोई ऐसी वैसी हरकत करी तो ये रब उस इंसान को जो इस वक्त जिंदगी के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है और वह आज भी मेरे और आपके खातिर मेरी और आपकी मोहब्बत में अपनी जिंदगी की सियासत की इतनी उरूज के बावजूद 8 बाई 8 की कोठरी में अकेला बंद है। वो मेरे और आपके फैसले का इंतजार कर रहा है, आपकी लड़ाई बहुत बड़ी है ना आपकी लड़ाई बहुजन समाज पार्टी से है ना आपकी लड़ाई कांग्रेस से है आपकी लड़ाई सरकार से, आप का चुनाव सरकार से है और सरकार आप पर कोई कसर नहीं छोड़ेगी। ये चुनाव में ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाने की। यह तमाम लोग चुनाव इसलिए नहीं लड़ रहे हैं कि ये चुनाव खुद जीत जाएँ। यह चुनाव सिर्फ इसलिए लड़ रहे हैं ताकि आपको चुनाव हराया जा सके।
बस तू मेरे वालिद को बचाले
अब्दुल्लाह आजम के मुताबिक जब बेगुनाह लोगों को भैंस चोरी, बकरी चोरी, पायल चोरी, मिट्टी चोरी, किताब चोरी और कौन सी चोरी करी थी शराब की बोतल चोरी, 16 हजार 600 रुपे की चोरी जब इन मुकदमों में बेकसूर लोगों को बंद किया जाएगा तो इंकलाब तो आएगा ही।
अब्दुल्लाह आजम के मुताबिक मुझसे डॉक्टर ने खुद कहा जब मैंने जिद करी कि मुझे तबीयत बताई जाए क्योंकि हम दोनों अलग-अलग कमरों में थे वो आईसीयू में थे और मैं ऊपर था इतनी फोर्स लगी हुई थी कि पता नहीं कौन आतंकवादी बंद हैं तो जो डॉक्टर मुझे देखने हैं क्योंकि वही टीम उनका भी इलाज कर रही थी तो मैंने बस उनसे इतना पूछा कि कैसी तबीयत है तो उन्होंने मुझसे कहा कि जो हमसे बन पा रहा है हम सो कर रहे हैं बाकी ऊपरवाला मालिक है और जब उनको वहां से ले जाने लगे आईसीयू तो बेहोशी की हालत में थे… तो जाते वक्त 2 मिनट को आंख खुली और मुझसे कहा कि बेटे अगर मुझे कुछ ऐसा हो गया कि मैं ठीक नहीं हो सकता और जो हो वह अपने घर जा के और मैंने दुआ की कि अल्लाह जेल तो मैं काट ही रहा हूँ ..मुझे कोई शिकायत नहीं है बस तू मेरे वालिद को बचाले। बहुत बुरा दौर देखा है बहुत सी रातें ऐसी आयीं जैसे आने वाला सवेरा अब देखने के काबिल नहीं बचेगा और जेल में ही मार दिए जाएंगे।
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