वॉशिंगटन/तेहरान: पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में युद्ध के बादल एक बार फिर गहरा गए हैं। पाकिस्तान में शांति वार्ता के विफल होने के बाद, अमेरिका ने सामरिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नौसैनिक घेराबंदी (Naval Blockade) शुरू कर दी है। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़े लहजे में तेहरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
“ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होंगे”
ओवल ऑफिस के बाहर एक अचानक बुलाई गई प्रेस कॉन्फ्रेंस में राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया कि ईरान के साथ मौजूदा विवाद की मुख्य जड़ उसकी परमाणु क्षमताएं हैं। ट्रंप ने कहा:
“यह पूरी तरह इस बात पर टिका है कि ईरान के पास कभी परमाणु हथियार नहीं होंगे। हमने कई मुद्दों पर चर्चा की, लेकिन वे इस शर्त पर सहमत नहीं हुए। यदि वे इस पर राजी नहीं होते, तो कोई समझौता नहीं होगा।”
हालांकि, ट्रंप ने यह भी दावा किया कि उन्हें पूरा विश्वास है कि दबाव के बीच ईरान बातचीत की मेज पर वापस लौटेगा। उन्होंने संकेत दिया कि ईरान की ओर से संपर्क किया गया है और वे समझौता करने के लिए उत्सुक हैं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकाबंदी शुरू
युद्ध के मोर्चे पर एक बड़ी कार्रवाई की पुष्टि करते हुए ट्रंप ने बताया कि अमेरिका ने नौसैनिक नाकाबंदी शुरू कर दी है। जब उनसे पूछा गया कि यह कब से प्रभावी है, तो उन्होंने कहा, “हां, यह आज सुबह 10:00 बजे से शुरू हो गई है।”
ट्रंप ने इस कदम को वैश्विक ‘ब्लैकमेलिंग’ के खिलाफ सुरक्षा बताया। उन्होंने कहा कि ईरान दुनिया को ब्लैकमेल करने की कोशिश कर रहा है और अमेरिका ऐसा होने नहीं देगा।
हमें होर्मुज की जरूरत नहीं, पर दुनिया को है
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के महत्व पर बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस मार्ग पर निर्भर नहीं है।
- ऊर्जा आत्मनिर्भरता: ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका अब सऊदी अरब और रूस से भी अधिक तेल और गैस का उत्पादन कर रहा है।
- वैश्विक जिम्मेदारी: उन्होंने कहा, “हमें इस जलमार्ग की आवश्यकता नहीं है, लेकिन दुनिया को है। हम वैश्विक बाजारों को स्थिर करने के लिए यह कदम उठा रहे हैं।”
‘ईरान की सैन्य शक्ति कमजोर हुई’
ईरान को चेतावनी देते हुए ट्रंप ने दावा किया कि उनकी (ईरान की) सैन्य क्षमताएं अब पहले जैसी नहीं रही हैं। उन्होंने कहा कि उनकी नौसेना, वायु सेना और रडार प्रणालियां बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। ट्रंप ने दो टूक शब्दों में कहा कि अगर ईरान समझौता नहीं करता है, तो परिणाम उसके लिए “सुखद नहीं होंगे”।
अन्य देश भी आएंगे साथ
राष्ट्रपति ने संकेत दिया कि जल्द ही कुछ अन्य देश भी इस नाकाबंदी में अमेरिका का साथ दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि कई देशों ने अपनी सेवाएं देने की पेशकश की है और इसकी घोषणा जल्द ही की जा सकती है।
मिडल ईस्ट में इस नाकाबंदी के बाद वैश्विक तेल की कीमतों और कूटनीतिक संबंधों पर गहरा असर पड़ने की संभावना है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता यह तनाव दुनिया को एक नए संघर्ष की ओर धकेल सकता है।
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