नई दिल्ली | 03 फरवरी 2026: जमाअत-ए-इस्लामी हिंद (JIH) के अध्यक्ष सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी ने केंद्रीय बजट 2026-27 पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि सरकार ने व्यापक आर्थिक स्थिरता और राजकोषीय अनुशासन (Fiscal Discipline) पर तो ध्यान दिया है, लेकिन यह बजट रोज़गार सृजन, सामाजिक कल्याण और बढ़ते सार्वजनिक कर्ज जैसे गंभीर मुद्दों का समाधान करने में विफल रहा है।
पूंजीगत व्यय बनाम आम आदमी की ज़रूरतें
मीडिया को जारी एक बयान में जमाअत के अध्यक्ष ने कहा कि बजट का झुकाव ‘कैपिटल-इंटेंसिव’ ग्रोथ की तरफ है। उन्होंने कहा:
“सरकार ने ₹12.2 लाख करोड़ का रिकॉर्ड पूंजीगत व्यय (Capex) घोषित किया है, जो इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए तो ठीक है, लेकिन अनौपचारिक मज़दूरों, ग्रामीण परिवारों और युवाओं की आय पर इसका कोई तत्काल सकारात्मक प्रभाव नहीं दिखेगा।”
बजट 2026 की मुख्य चिंताएं: एक नज़र में
जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने बजट के कई पहलुओं की आलोचना की है:
- स्वास्थ्य और शिक्षा की अनदेखी: स्वास्थ्य के लिए ₹1.03 लाख करोड़ और शिक्षा के लिए ₹1.39 लाख करोड़ का आवंटन राष्ट्रीय नीति के लक्ष्यों से काफी कम है।
- अल्पसंख्यक कल्याण: अल्पसंख्यक मंत्रालय के लिए ₹3,400 करोड़ का आवंटन नाकाफी है। हुसैनी ने कहा कि पिछले वर्षों में स्कॉलरशिप फंड का पूरा इस्तेमाल न होना प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है।
- बढ़ता कर्ज और ब्याज: बजट दस्तावेजों के अनुसार, सरकार की कमाई का बड़ा हिस्सा कर्ज से आता है और खर्च का लगभग 20% केवल ब्याज चुकाने में चला जाता है।
- टैक्स का बोझ: कॉर्पोरेट टैक्स में छूट के बावजूद आम नागरिकों पर टैक्स का बोझ बढ़ा है। GST जैसे अप्रत्यक्ष करों ने गरीब और मध्यम वर्ग की कमर तोड़ दी है।
‘कर्ज आधारित विकास’ पर नैतिक सवाल
सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी ने ‘ब्याज आधारित कर्ज’ पर निर्भरता को अन्यायपूर्ण बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि जब सार्वजनिक संसाधन कल्याणकारी योजनाओं के बजाय केवल कर्जदाताओं को भुगतान करने में खर्च होंगे, तो गरीबी उन्मूलन और मानव विकास (Human Development) जैसे लक्ष्य कभी पूरे नहीं हो पाएंगे।
जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने सरकार से मांग की है कि वह अपनी वित्तीय प्राथमिकताओं पर पुनर्विचार करे। संगठन ने श्रम-प्रधान विकास (Labor-intensive growth), प्रगतिशील कराधान और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने का आह्वान किया है। हुसैनी ने जोर देकर कहा कि “सच्चा विकास वह है जिसका असर समाज के सबसे कमजोर वर्ग पर दिखे, न कि केवल इंफ्रास्ट्रक्चर के आंकड़े।”
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