यूनानी चिकित्सा: विरासत के संरक्षण से लेकर आधुनिक जागरूकता तक का सफर; लखनऊ में जुटेगा दिग्गजों का जमावड़ा

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नई दिल्ली: यूनानी चिकित्सा पद्धति के पुनर्जागरण और इसके वैश्विक विस्तार को लेकर ‘ऑल इंडिया यूनानी तिब्बी कांग्रेस’ ने अपनी कमर कस ली है। आगामी 12 फ़रवरी को मनाये जाने वाले ‘विश्व यूनानी मेडिसिन डे’ की पूर्व संध्या पर दरियागंज में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रोफेसर मुश्ताक अहमद ने इस दिन की महत्ता को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आयोजन मात्र एक औपचारिक उत्सव नहीं, बल्कि यूनानी चिकित्सा के प्रति जन-जागरूकता का एक ‘मैक्रो मिशन’ है।

ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य और विकास यात्रा

बैठक को संबोधित करते हुए प्रोफेसर अहमद ने उस ऐतिहासिक क्षण को साझा किया जब वर्ष 2010 में आयुष मंत्रालय की तत्कालीन सचिव श्रीमती जेलजा साहिबा (IAS) ने उनके प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए मसीह-उल-मुल्क हकीम अजमल ख़ाँ के जन्मदिवस को आधिकारिक तौर पर ‘यूनानी मेडिसिन डे’ घोषित किया था। वर्ष 2011 से शुरू हुआ यह सफर आज एक बड़े आंदोलन का रूप ले चुका है, जिससे न केवल हकीम साहब की विरासत सुरक्षित हुई है, बल्कि यूनानी पैथी के प्रति वैश्विक विमर्श भी बढ़ा है।

लखनऊ बनेगा वैचारिक मंथन का केंद्र

इस वर्ष के मुख्य समारोह के लिए नवाबों के शहर लखनऊ को चुना गया है। कांग्रेस के महासचिव डॉ. सैयद अहमद ख़ाँ ने बताया कि डॉ. एस.एम. अहसन एजाज़ और प्रोफेसर नफ़ासत अली अंसारी के नेतृत्व वाली स्वागत समिति ने तैयारियाँ पूरी कर ली हैं।

समारोह के मुख्य आकर्षण:

  • राजनीतिक एवं शैक्षणिक भागीदारी: उत्तर प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री दानिश अंसारी और आयुर्वेद संस्थान के निदेशक प्रोफेसर प्रदीप कुमार प्रजापति जैसे नाम इस मंच की शोभा बढ़ाएंगे।
  • सम्मान समारोह: यूनानी औषध निर्माण (Pharmacy) के क्षेत्र में क्रांतिकारी शोध और योगदान के लिए डॉ. हामिद सिद्दीकी, जनाब क़मर अशरफ़ और जनाब जावेद अली को प्रतिष्ठित ‘हकीम अजमल ख़ाँ फ़ार्मेसी अवॉर्ड’ से नवाज़ा जाएगा।

विमर्श और भविष्य की राह

बैठक में केवल उत्सव पर ही चर्चा नहीं हुई, बल्कि यूनानी चिकित्सा के वर्तमान ढांचे और भविष्य की चुनौतियों पर भी गंभीर मंथन हुआ। इस दौरान मोहम्मद नौशाद (राष्ट्रीय समन्वयक), डॉ. उज़ैर बक़ाई, और डॉ. मिर्ज़ा आसिफ़ बेग सहित देश भर से आए चिकित्सा विशेषज्ञों ने शिरकत की। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आयोजनों से यूनानी चिकित्सा पद्धति को मुख्यधारा की स्वास्थ्य सेवाओं में और अधिक मजबूती मिलेगी।

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