…. …… ग़ज़ल …….. …..

आदमी हम तो एहतेजाज के हैं,
वो हमारे कहाँ मिज़ाज के हैं,
गैर के साथ इश्क़ मत करना
हम तुम्हारे नहीं समाज के हैं,
मेरे बच्चों की ममलकत है अलग
वो नहीं कल के बल्कि आज के हैं,
मज़हबी रंग मे रंगे हुये लोग
ये सितमगर तो तख़्त ओ ताज के हैं,
उन पे वाज़ेह न होइए ‘आमिर’
जाने किस क़ौम किस रिवाज के हैं
- सऊदी अरब पर हूतियों का बड़ा हमला, सैन्य अड्डे के हथियार डिपो को बनाया निशाना
- गौशालाओं में क्रूरता और लापरवाही की शिकायत पर बड़ा एक्शन: बरेली मण्डल में उच्चस्तरीय जाँच के आदेश
- महविश की संदिग्ध मौत का मामला: फिल्मी अंदाज में चली थी गोली, इस तरह उठा पर्दा
- दिल्ली: शाहीन बाग पुलिस की त्वरित कार्रवाई, वाहन चोरी के मामले में 2 पकड़े गए, चोरी की स्कूटी बरामद
- ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान की अमेरिका को चुनौती: “अगर हिम्मत है तो ईरानी सेना का सामना करो”
