…. …… ग़ज़ल …….. …..

आदमी हम तो एहतेजाज के हैं,
वो हमारे कहाँ मिज़ाज के हैं,
गैर के साथ इश्क़ मत करना
हम तुम्हारे नहीं समाज के हैं,
मेरे बच्चों की ममलकत है अलग
वो नहीं कल के बल्कि आज के हैं,
मज़हबी रंग मे रंगे हुये लोग
ये सितमगर तो तख़्त ओ ताज के हैं,
उन पे वाज़ेह न होइए ‘आमिर’
जाने किस क़ौम किस रिवाज के हैं
- ईरान मुद्दे पर ट्रंप जल्द लेंगे फैसला, बोले- परमाणु हथियार हासिल करने की योजना लगभग छोड़ी
- केरल सरकार ने CEC ज्ञानेश कुमार से जुड़े 2006 के मामले में विजिलेंस जांच का दिया आदेश
- फ्रांस में छात्र आंदोलन हिंसक, 5,000 गिरफ्तार; पेरिस पुलिस प्रमुख ने की शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अपील
- Army Commander Northern Command Chairs Security Review Meeting in Srinagar
- JIH Urges Government to Choose Dialogue Over Confrontation on Public Issues
