सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने रियाद में “रणनीतिक पारस्परिक रक्षा समझौते” पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता पाकिस्तान-सऊदी अरब की रक्षा क्षमता और क्षेत्रीय सुरक्षा को बढ़ावा देगा।
पाकिस्तान और सऊदी अरब ने रियाद में एक ऐतिहासिक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसे “रणनीतिक पारस्परिक रक्षा समझौता” (Strategic Mutual Defence Agreement – SMDA) नाम दिया गया है। इस समझौते पर सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हस्ताक्षर किए।
समझौते का मुख्य उद्देश्य
यह रक्षा समझौता दोनों देशों की साझा सुरक्षा, रक्षा सहयोग और शांति स्थापित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। समझौते की शर्तों के अनुसार:
- किसी भी देश पर बाहरी सशस्त्र हमला दोनों देशों पर हमला माना जाएगा।
- दोनों देश आक्रमण की स्थिति में एक-दूसरे को सैन्य सहायता प्रदान करेंगे।
- रक्षा क्षमताओं का एकीकरण और तत्परता बढ़ाई जाएगी।
- साझा सैन्य प्रशिक्षण, बहुपक्षीय अभ्यासों और रक्षा-औद्योगिक सहयोग को और मजबूत किया जाएगा।
रणनीतिक महत्व
संयुक्त बयान में कहा गया कि सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच आठ दशकों से चली आ रही ऐतिहासिक साझेदारी इस समझौते से और गहरी हुई है।
- पाकिस्तान अब पवित्र मस्जिदों की सुरक्षा को लेकर सऊदी अरब का सहयोगी बन गया है।
- यह समझौता दोनों देशों को सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा में सक्षम बनाएगा।
- वर्तमान और भविष्य के खतरों को ध्यान में रखते हुए यह समझौता रक्षा क्षेत्र को सुदृढ़ करेगा।
राजनयिक और आर्थिक आयाम
- यह समझौता केवल सैन्य सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और कूटनीतिक संबंधों के लिए भी फायदेमंद माना जा रहा है।
- एक देश की ताकत को दूसरे देश की रक्षा में भी इस्तेमाल करने की व्यवस्था की गई है।
- अल यमामा पैलेस में हुई आधिकारिक बैठक के दौरान दोनों प्रतिनिधिमंडलों ने साझा हितों पर गहन चर्चा की। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस अवसर पर शाह सलमान बिन अब्दुलअज़ीज़ को शुभकामनाएं भी दीं।
अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया
पाक-सऊदी रक्षा समझौते ने वैश्विक स्तर पर चर्चा को जन्म दिया है:
- अल जजीरा (कतर): इस समझौते को क्षेत्र के लिए नया आयाम बताते हुए कहा कि इसका असर भारत सहित पूरे दक्षिण एशिया पर पड़ सकता है।
- सीएनएन (अमेरिका): यह समझौता खाड़ी देशों के अमेरिका में घटते विश्वास को दर्शाता है और एक नई रणनीतिक दिशा की ओर इशारा करता है।
- रॉयटर्स: कतर पर इजरायल के हमलों के बाद खाड़ी देशों में अमेरिका पर निर्भरता कम होती दिख रही है।
- विश्लेषक माइकल कुगेलमैन (अमेरिका): चीन, तुर्की और अब सऊदी अरब के समर्थन से पाकिस्तान की स्थिति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी मजबूत हो गई है।
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