Emmanuel Macron India Visit: भारत पहुंचे फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों, PM मोदी के साथ रक्षा और AI पर होगी ‘महा-डील’

0
239
French President Arrives In Mumbai Ahead Of Key Talks With PM Modi
भारत पहुंचे फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों

मुंबई: भारत और फ्रांस के बीच रणनीतिक रिश्तों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (Emmanuel Macron) आज तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे पर भारत पहुंचे। मुंबई एयरपोर्ट पर महाराष्ट्र के राज्यपाल आचार्य देवव्रत और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उनका भव्य स्वागत किया। राष्ट्रपति बनने के बाद मैक्रों का यह चौथा भारत दौरा है, जो दोनों देशों के बीच बढ़ती नजदीकियों को दर्शाता है।

पीएम मोदी और मैक्रों की मुलाकात: एजेंडे में क्या है खास?

आज मुंबई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों के बीच एक हाई-प्रोफाइल द्विपक्षीय बैठक होगी। इस बैठक में न केवल व्यापार बल्कि भविष्य की तकनीक पर भी बड़ा दांव लगाया जाएगा। मुख्य चर्चा के विषय निम्नलिखित हैं:

  • रक्षा सहयोग: 114 राफेल विमानों की खरीद और सैन्य समझौतों का विस्तार।
  • इनोवेशन: गेटवे ऑफ इंडिया पर ‘इंडिया-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन’ का आगाज।
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI): दिल्ली में आयोजित होने वाले AI समिट में भागीदारी।
  • अन्य क्षेत्र: स्वास्थ्य, स्किल डेवलपमेंट और मजबूत ग्लोबल सप्लाई चेन।

रक्षा क्षेत्र में बड़ी छलांग: राफेल और 10 साल का नया रोडमैप

भारत सरकार ने हाल ही में फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इस दौरे के दौरान बेंगलुरु में होने वाली छठी वार्षिक रक्षा वार्ता में रक्षा सहयोग समझौते को अगले 10 वर्षों के लिए बढ़ाने पर मुहर लग सकती है। यह कदम हिंद महासागर और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की सुरक्षा स्थिति को और मजबूत करेगा।

वैश्विक मुद्दों पर भी होगी चर्चा

सिर्फ व्यापार ही नहीं, बल्कि दोनों नेता दुनिया के जलते हुए मुद्दों पर भी अपनी राय साझा करेंगे। इसमें शामिल हैं:

  1. रूस-यूक्रेन युद्ध और इसके वैश्विक प्रभाव।
  2. गाजा की स्थिति और मध्य पूर्व में शांति।
  3. इंडो-पैसिफिक रणनीति में आपसी समन्वय।

खास बात: “इंडिया-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन” कार्यक्रम 2026 तक चलेगा, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच तकनीकी और सांस्कृतिक सेतु बनाना है।

मैक्रों का यह दौरा भारत-फ्रांस की ‘नो-लिमिट’ पार्टनरशिप का प्रमाण है। करीब एक दर्जन समझौतों (MoUs) पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद के साथ, यह यात्रा एशिया में शक्ति संतुलन और तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।