‘नो किंग्स’ आंदोलन: ट्रंप के ‘क्राउन’ वीडियो के बीच अमेरिका में लाखों प्रदर्शनकारी सड़कों पर

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अमेरिका: अमेरिका के कई शहरों में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों और कथित अधिनायकवादी रवैये के विरोध में शनिवार को ‘नो किंग्स’ नामक आंदोलन के तहत बड़े पैमाने पर जनप्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारियों ने सरकार की कठोर नीतियों और बल प्रयोग के खिलाफ नारे लगाए, वहीं राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एआई-जनरेटेड वीडियो साझा कर इसका जवाब दिया।

ट्रंप ने फॉक्स बिजनेस को दिए साक्षात्कार में कहा, “वे मुझे ‘राजा’ कह रहे हैं, लेकिन मैं राजा नहीं हूं।” उन्होंने यह भी कहा कि यदि डेमोक्रेटिक नीतियां देश को कमजोर करती रहीं, तो उन्हें हमेशा के लिए सत्ता से बाहर रहना चाहिए। इसके कुछ घंटे बाद राष्ट्रपति ने अपने ट्रुथ सोशल अकाउंट पर एक एआई-जनरेटेड क्लिप पोस्ट की, जिसमें उन्हें मुकुट पहने और लड़ाकू विमान उड़ाते हुए दिखाया गया है। वीडियो में उन्हें प्रदर्शनकारियों पर मल जैसा पदार्थ गिराते हुए देखा जा सकता है।

https://twitter.com/LoveRunandPray/status/1979654263778456028

उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी एक एआई-जनरेटेड वीडियो साझा किया, जिसमें ट्रंप मुकुट और केप में दिख रहे हैं, जबकि नैन्सी पेलोसी और अन्य डेमोक्रेट उनके सामने झुके हुए हैं।

समाचार एजेंसी एपी के अनुसार, जब देशभर में यह विरोध हो रहा था, तब राष्ट्रपति ट्रंप सप्ताहांत के लिए फ्लोरिडा स्थित अपने मार-ए-लागो आवास पर थे।

25 राज्यों में 2,500 से अधिक रैलियाँ

‘नो किंग्स’ आंदोलन के तहत विरोध प्रदर्शन अमेरिका के लगभग हर प्रमुख शहर में हुए — वाशिंगटन डीसी, बोस्टन, अटलांटा, शिकागो और लॉस एंजिल्स सहित लगभग 2,500 स्थानों पर। प्रदर्शनकारियों ने नारे लिखे बैनर उठाए जैसे “विरोध प्रदर्शन से बढ़कर देशभक्ति कुछ नहीं” और “फासीवाद का विरोध करो।”

सैन फ्रांसिस्को के ओशन बीच पर सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने अपने शरीर से “नो किंग!” संदेश लिखा।

एक प्रदर्शनकारी ने कहा, “ऐसा लगता है कि हम उस अमेरिका में रह रहे हैं जिसे पहचानना मुश्किल हो गया है।”

एक अन्य प्रदर्शनकारी, जो 20 वर्षों तक सीआईए में कार्यरत रहे, ने बताया, “मैंने स्वतंत्रता और उग्रवाद के खिलाफ विदेशों में लड़ाई लड़ी, लेकिन अब वही उग्रवाद अमेरिका में दिखाई दे रहा है, जो देश को किसी नए गृहयुद्ध की ओर धकेल सकता है।”

ट्रंप के दोबारा व्हाइट हाउस लौटने के बाद यह तीसरा बड़ा राष्ट्रीय विरोध है। इससे पहले जून में भी ‘नो किंग्स’ आंदोलन के तहत 2,100 स्थानों पर प्रदर्शन हुए थे।

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