Surajkund Mela Accident: सूरजकुंड मेले में झूला गिरने से इंस्पेक्टर समेत 2 की मौत, SIT गठित; जानें अब तक के बड़े अपडेट्स

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Two people, including an inspector, died after a swing collapsed at the Surajkund fair.
सूरजकुंड मेले में झूला गिरने से इंस्पेक्टर समेत 2 की मौत

Surajkund Mela Accident Update: हरियाणा के फरीदाबाद में चल रहे विश्व प्रसिद्ध सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेले में एक बड़ा हादसा हो गया। मेले में एक झूला अचानक टूटने से ड्यूटी पर तैनात पुलिस इंस्पेक्टर समेत दो लोगों की जान चली गई। इस घटना ने मेले की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए SIT (विशेष जांच दल) का गठन कर दिया है।

कैसे हुआ हादसा? प्रत्यक्षदर्शियों की जुबानी

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, झूला अपनी सामान्य गति से चल रहा था कि अचानक वह एक तरफ झुक गया और तेज धमाके के साथ जमीन पर आ गिरा। झूला गिरते ही चारों तरफ चीख-पुकार मच गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। स्थानीय लोगों और सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया और घायलों को एंबुलेंस के जरिए नजदीकी अस्पताल पहुँचाया।

हादसे में इंस्पेक्टर समेत दो की मौत

इस दर्दनाक हादसे में मरने वालों में पलवल में तैनात इंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद भी शामिल हैं। वे मेले में सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात थे और बचाव कार्य के दौरान गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिसके बाद उन्होंने दम तोड़ दिया। हरियाणा के डीजीपी ने उनकी शहादत पर दुख जताते हुए परिवार को 1 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देने का एलान किया है।

प्रशासन की कार्रवाई और SIT जांच

घटना के तुरंत बाद पुलिस ने पूरे इलाके को सील कर दिया और जेसीबी व हाइड्रोलिक मशीनों की मदद से मलबे को हटाया गया।

  • SIT का गठन: हरियाणा के पर्यटन मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने बताया कि ADC की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय कमेटी (SIT) बनाई गई है।
  • FIR दर्ज: झूला संचालक के खिलाफ लापरवाही का मामला दर्ज कर लिया गया है।
  • जांच के बिंदु: जांच टीम यह पता लगाएगी कि क्या झूला पुराने नट-बोल्ट्स पर चल रहा था या रखरखाव (Maintenance) में कोई बड़ी चूक हुई थी।

मेला फिलहाल बंद, सुरक्षा पर सवाल

हादसे के बाद प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से सूरजकुंड मेले को फिलहाल बंद कर दिया है। पर्यटकों से अपील की गई है कि वे अभी इस इलाके से दूर रहें। इस घटना ने मेलों में लगने वाले भारी-भरकम झूलों की फिटनेस और उनके सेफ्टी सर्टिफिकेट्स की अनिवार्यता पर एक नई बहस छेड़ दी है।