मोहन भागवत अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा का करेंगे दौरा, क्या है मकसद? RSS ने बताया मास्टरप्लान

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के आगामी अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन दौरों को लेकर जारी चर्चाओं के बीच संघ ने इसकी वजह साफ कर दी है। विशाखापत्तनम में आयोजित ‘अखिल भारतीय समन्वय बैठक’ के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए आरएसएस के सह सरकार्यवाह मुकुंद सीआर ने मोहन भागवत के विदेश दौरों के उद्देश्यों और युवाओं (‘जेन जी’) को संघ से जोड़ने की रणनीतियों पर खुलकर जानकारी दी।

मोहन भागवत के विदेश दौरे के 3 मुख्य उद्देश्य

सरसंघचालक की प्रस्तावित अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन यात्रा को संघ के शताब्दी वर्ष के वैश्विक संपर्क अभियान का हिस्सा बताते हुए मुकुंद सीआर ने तीन प्रमुख बिंदु रेखांकित किए:

  • भ्रांतियों को दूर करना: भारत, हिंदू समाज और संघ के बारे में वैश्विक स्तर पर फैलाए जा रहे दुष्प्रचार के बीच तथ्यपरक और सकारात्मक दृष्टिकोण पेश करना।
  • ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का संदेश: भारत के ऋषियों द्वारा दिए गए वैश्विक एकात्मता के संदेश को दुनिया के अलग-अलग समाजों तक पहुंचाना।
  • भारतीय प्रवासियों से जुड़ाव: विभिन्न देशों में रह रहे हिंदुओं और भारतीय मूल के लोगों के अधिकारों और हितों को लेकर वहां के मुख्यधारा समाज के साथ संवाद बढ़ाना।

अपने इस दौरे के दौरान डॉ. मोहन भागवत न्यूयॉर्क में ‘यूनिवर्सल वननेस’ (Universal Oneness) कार्यक्रम के अलावा टोरंटो और लंदन में सामुदायिक नेतृत्व के कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे।

युवाओं और ‘जेन जी’ को संस्कृति से जोड़ने का संघ प्लान

युवा पीढ़ी में सांस्कृतिक मूल्यों और परंपराओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने के सवाल पर सह सरकार्यवाह ने बताया कि केवल भाषणों या पोस्टरों से बदलाव संभव नहीं है। इसके लिए निरंतर संवाद, युवाओं की भावनाओं को समझना और उनके सामने भारत की सांस्कृतिक विरासत को अनुभव के स्तर पर रखना जरूरी है।

संघ के अनुसार, इस वर्ष लगभग 21,000 युवा स्वयंसेवकों ने 21 दिवसीय प्रशिक्षण वर्गों में भाग लिया है। इसके अलावा, दैनिक शाखाओं में आने वालों में 60 प्रतिशत से अधिक संख्या युवाओं की है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP), बजरंग दल और हिंदू जागरण मंच जैसे संगठनों के माध्यम से युवकों और युवतियों के बीच लगातार कार्य किया जा रहा है।

आरएसएस ने विश्वास जताया है कि आज की युवा पीढ़ी के सकारात्मक प्रतिसाद को देखते हुए भारत का भविष्य सुरक्षित हाथों में है। इसके साथ ही धार्मिक, आध्यात्मिक और सामाजिक संगठनों से भी युवाओं में सांस्कृतिक संवर्धन के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया गया है।

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