रामपुर: शहर की ऐतिहासिक फिजाओं में शनिवार की रात उर्दू अदब के नाम रही। मशहूर शायर ताहिर फराज की याद में फोर्ट ग्राउंड में आयोजित ‘आल इंडिया मुशायरे’ ने साहित्य प्रेमियों को देर रात तक मंत्रमुग्ध रखा। रात 10 बजे से शुरू हुआ यह सिलसिला तड़के तक चलता रहा, जिसमें तालियों की गूंज और ‘वाह-वाह’ के शोर ने माहौल को गरमाए रखा।
मुख्य अतिथि और श्रद्धांजलि
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रभारी संजय सिंह रहे। मंच पर मौजूद अतिथियों और साहित्यकारों ने मरहूम ताहिर फराज को याद करते हुए उन्हें उर्दू अदब की एक बेहद मजबूत और प्रभावशाली आवाज करार दिया। वक्ताओं ने कहा कि ताहिर फराज की रचनात्मक विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए मशाल का काम करेगी।
मंच पर उतरीं अदब की बड़ी हस्तियां
मुशायरे में चरण सिंह बशर, पॉपुलर मेरठी, अकील नोमानी, निघत अमरोही, रिक अदा, चराग शर्मा, अबरार काशिफ, अजहर इनायती सहित कई अन्य मशहूर शायरों ने अपनी ग़ज़लें और नज़्में पेश कीं। हर शेर पर श्रोताओं की तालियों की गूंज देर तक सुनाई देती रही।
कार्यक्रम में कई शायरों ने इश्क, इंसानियत, समाजी मुद्दों और मौजूदा हालात पर अपनी बात असरदार अंदाज में रखी। कुछ शेरों में ताहिर फराज की याद और उनके साहित्यिक योगदान की झलक साफ नजर आई, तो कुछ प्रस्तुतियों में सामाजिक तंज और भावनात्मक रंग भी दिखा।
देर रात तक जमी रही महफिल
फोर्ट ग्राउंड में उमड़ी भारी भीड़ ने यह साबित कर दिया कि रामपुर आज भी अपनी अदबी पहचान को सीने से लगाए हुए है। सन्नाटे को चीरती शायरों की आवाज और उस पर श्रोताओं का रिस्पॉन्स माहौल को और भी रूहानी बना रहा था।
“यह आयोजन सिर्फ एक मुशायरा नहीं, बल्कि ताहिर फराज की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की एक कोशिश है।” — फैसल लाला
रामपुर की अदबी रिवायत
रामपुर का किला मैदान एक बार फिर उसी पुरानी तहजीब का गवाह बना, जिसके लिए यह शहर विश्वभर में मशहूर है। जानकारों का मानना है कि ऐसे आयोजनों से न केवल उर्दू शायरी को बढ़ावा मिलता है, बल्कि शहर की साहित्यिक पहचान भी और गहरी होती है।
यह शाम ताहिर फराज के चाहने वालों के लिए एक भावनात्मक सफर की तरह रही, जो यादों और अल्फाजों के संगम के साथ संपन्न हुई।
- रामपुर: ताहिर फराज की याद में सजी शायरी की महफिल, देश के दिग्गज शायरों ने बांधा समां

- फ़ैज़ अहमद फ़ैज़: वो शायर जिसकी कलम ने हुकूमतों को हिला दिया

- ख़ामोश हो गया तरन्नुम का जादू: उर्दू शायरी के ‘ताजमहल’ ताहिर फ़राज़ का विदाई सफ़र

- विश्व उर्दू दिवस 2025 पुरस्कार के लिए विजेताओं के नामो का एलान

- ओखला प्रेस क्लब ने प्रो. खालिद महमूद को उनकी शैक्षणिक एवं साहित्यिक सेवाओं के लिए सम्मानित किया

- एनसीपीयूएल की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, 9 महीने से खाली पड़े परिषद के पुनर्गठन की रखी मांग

- ख़ून के धब्बे धुलेंगे कितनी बरसातों के बाद

- आदमी हम तो एहतेजाज के हैं…

