मैकडॉनल्ड्स ने उत्तर और पूर्वी भारत में अपने अधिकांश आउटलेट्स पर भोजन तैयार करने में टमाटर का उपयोग बंद कर दिया है।
इसका कारण टमाटर की कीमतों में पांच गुना वृद्धि को बताया गया है क्योंकि प्रतिकूल मौसम की स्थिति के कारण फसल उत्पादन प्रभावित हुआ है।
दरअसल भारत में टमाटर के दाम आसमान पर पहुंच गए हैं। बाजार में टमाटर की कीमतें (Tomatos Price Hiked) कई जगहों पर 200 रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुकी हैं।
टमाटर की कीमतें इतनी बढ़ने की वजह से देश के उत्तरी एवं पूर्वी क्षेत्रों के अपने अधिकांश होटलों में खाने के सामान में टमाटर का इस्तेमाल बंद कर दिया है। अब लोग टमाटर खाना तो दूर इसे खरीदने से भी बच रहे हैं।
टमाटर की कीमतें इतनी ज्यादा हो गई हैं कि आम आदमी तो छोड़िए बड़ी-बड़ी कंपनियों ने भी इसका इस्तेमाल बंद कर दिया है। फास्ट फूड चेन की बड़ी कंपनी मैकडॉनल्ड्स (McDonald’s) ने भी अपने बर्गर और रैप्स से टमाटर (Tomatos) हटा दिए हैं। इससे लोग नाराज हैं। लोगों के मुताबिक, इससे टेस्ट पर असर पड़ेगा।
इधर सोशल मीडिया पर लोग जमकर एक दूसरे को मीम्स शेयर कर रहे हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार वैश्विक फास्ट फूड श्रृंखला मैकडॉनल्ड्स ने कहा है कि टमाटर को चरणबद्ध तरीके से बंद करने के कारणों में गुणवत्तापूर्ण उत्पादों की अनुपलब्धता और कीमतों में भारी बढ़ोतरी शामिल है।
भारतीय घरेलू सामानों की कीमतें हाल ही में बढ़ी हैं क्योंकि मानसून में देरी, भारी बारिश और सामान्य से अधिक तापमान के कारण देश में फसलें प्रभावित हुई हैं।
भारत भर में व्यंजनों में टमाटर का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है और उनकी कीमत में बढ़ोतरी से पहले प्याज की कीमत में बढ़ोतरी के समान व्यापक विरोध प्रदर्शन हो सकता है। इन विरोध प्रदर्शनों ने वास्तव में दक्षिण एशियाई देश में सरकारें गिरा दी हैं।
6 जुलाई को प्रकाशित भारतीय रिज़र्व बैंक के शोधकर्ताओं के एक अध्ययन के अनुसार, लागत में कटौती से मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के केंद्रीय बैंक के प्रयासों पर भी असर पड़ सकता है और इसका आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
अध्ययन में कहा गया है कि टमाटर, प्याज और आलू देश के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक संयुक्त टोकरी का एक छोटा सा हिस्सा हैं, लेकिन हेडलाइन मुद्रास्फीति में उतार-चढ़ाव में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
इनकी कीमतों में वृद्धि से अन्य सब्जियों और वस्तुओं की कीमतों में भी वृद्धि हो सकती है और इसका मुद्रास्फीति और खाद्य सुरक्षा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
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