अहमदाबाद आई एम सी आर अधिवेशन में पूर्व केंद्रीय मंत्री खुर्शीद ने मोदी सरकार की नीतियों पर उठाए सवाल, पूर्व डिप्टी स्पीकर राज्य सभा के रहमान ने कहा नफरत का बीज बोया जा रहा है।
गुजरात(अंज़रुल बारी): इंडियन मुस्लिम फॉर सिविल राइट्स (IMCR) पिछले 1 वर्ष से देश के विभिन्न राज्यों में अनेक कार्यक्रमों का आयोजन कर चुकी है और आज 26 अगस्त 2023 को अहमदाबाद में पाल्डी स्थित रवीन्द्रनाथ टैगोर हॉल में एक दिवसीय प्रदेश स्तरीय प्रतिनिधि अधिवेशन का आयोजन हुआ।
कॉन्फ्रेंस के संयोजक, आई.एम.सी.आर के राष्ट्रीय संगठन महासचिव डॉक्टर आजम बेग एवं गुजरात प्रदेश कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश अध्यक्ष श्री वजीर खान पठान ने संयुक्त रूप से एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि विभिन्न समुदायों के बुद्धिजीवी, एवं रिटायर्ड प्रशासनिक एवं न्यायिक अधिकारी व शिक्षाविद तथा विभिन्न राजनीतिक दलों के राजनेता अधिवेशन में शरीक रहे.
इस अवसर पर अधिवेशन को संबोधित करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा कि देश के सामने अनेक चुनौतियां हैं लेकिन सबसे गंभीर चिंता का विषय संविधान और धर्मनिरपेक्षता को लेकर है जिसे गंभीर चुनौतियों का सामना है लोकसभा में और राज्यसभा में जिस तरह से मुद्दों से भटकाने की कोशिश की जा रही है और अपोजीशन की आवाज को दबाया जा रहा है यह भी एक बड़ी समस्या है।
राज्यसभा के पूर्व डिप्टी स्पीकर के. रहमान ने कहा कि इस समय जिस तरह की राजनीति की जा रही है वह देश के लिए बहुत खतरनाक और धर्मनिरपेक्षता के लिए खुला चैलेंज है देश की आम जनता समस्याओं से बुरी तरह त्रस्त है लेकिन ऐसे समय में भी चुनाव जीतने मात्र के लिए संविधान तक को दांव पर लगा दिया गया गया है। सभा को संबोधित करते हुए प्लानिंग कमीशन की पूर्व सदस्य सैय्यदा साय्येदैन हमीद ने कहा कि अब समय आ गया है जब महिलाओं को भी हर जुल्म और ज्यादती के विरोध में खड़ा होना होगा और जो कुछ गुजरात में हुआ है ऐसा शायद ही कहीं हुआ हो विशेष रूप से बिलकीस बानो केस के मुलजिमों की रिहाई पर और फिर उनका सम्मान किए जाने पर चिंता व्यक्त करते हुए कि हम ने ऐसे समाज की कल्पना नहीं की थी उन्होंने मणिपुर हिंसा का भी जिक्र किया और इसे देश के एकता और अखंडता के लिए खतरा बताया।
समाजवादी पार्टी के नेता अबू आसिम आज़मी ने संविधान को लेकर कहा कि हमारे लिए देश सर्वोपरि होना चाहिए और समाज के किसी भी व्यक्ति के साथ अन्याय या नाइंसाफी होती है तो उसके लिए उठ खड़े होना चाहिए इससे बुरा समय शायद ही कभी देश पर आया हो जहां समुदाय विशेष के विरोध में सत्ता के संरक्षण में असामाजिक तत्व संगठित होकर सड़कों पर संविधान विरोधी और समाज विरोधी नारे लगाए महिलाओं के साथ खुलेआम ज्यादतियां हों और सत्ता पक्ष खामोश बैठा रहे हमें सबको मिलकर देश की एकता और अखंडता के लिए एकजुट होना चाहिए।
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और सांसद शक्ति सिंह गोहिल ने मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए लोकतंत्र के चीर हरण की संज्ञा दी. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के करीबी अधिकारी नए संविधान की वकालत कर रहे हैं. गुजरात विधानसभा के सदस्यों और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने भी भी सम्मेलन को संबोधित किया. .पूर्व सांसद और आई.एम.सी.आर के अध्यक्ष मो. अदीब ने कहा कि संवैधानिकता और धर्मनिरपेक्षता ही आगे का रास्ता है. इसके बगैर देश आगे नहीं बढ़ सकता है।
अधिवेशन के संयोजक श्री वजीर पठान और सह संयोजक नासिर खान द्वारा सभी अतिथियों का माल्यार्पण कर स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया गया।
धन्यवाद भाषण में गुजरात अल्पसंख्यक कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष पठान ने आई एम सी आर को समय की आवाज और आवश्यकता बताते हुए आम जन को इन जैसे संगठनों को मजबूत करने और संगठित होकर संविधान और देश को बचाने के लिए आगे आने को कहा सहसंयोजक श्री मिर्जा असलम बैग ने भी अधिवेशन में पधारे सभी अतिथियों और गणमान्य नागरिकों और उपस्थित श्रोताओं का आभार व्यक्त किया और गुजरात के सभी जिलों से पधारे प्रतिनिधियों को आश्वस्त करते हुए कहा की जब भी आई एम सी आर का प्रदेश स्तरीय संगठन बनेगा प्रदेश के सभी बुद्धिजीवीयों,सिविल सोसाइटी के वरिष्ठ सदस्यों और सभी तरह के राजनीतिक दलों को साथ लेकर आम सहमति से धर्मनिरपेक्ष शक्तियों को मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा।
- बंगाल चुनाव का पहला चरण: हिंसा और ईवीएम की खराबी के बीच रिकॉर्ड 92% मतदान

- ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से होगा ‘आतंकिस्तान’ का अंत: पहलगाम हमले की बरसी पर गरजे इंद्रेश कुमार

- Operation Sindoor to Continue Until ‘Terroristan’ is Eliminated: Indresh Kumar

- जामिया मिल्लिया इस्लामिया स्कूल का कक्षा 10वीं बोर्ड रिजल्ट घोषित, छात्राएं फिर आगे रहीं

- Jamia Millia Islamia Declares Class X Results: Girls Outshine Boys with 98.65% Pass Rate

- यूनानी तिब्बी कांग्रेस की बैठक: हकीम अजमल खान के विचारों को आगे बढ़ाने और जामिया में यूनानी कॉलेज की स्थापना पर ज़ोर

