रामपुर में इमाम हुसैन और हज़रत अब्बास की यौमे पैदाइश पर मना जश्न

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  • सजाया गया इमामाबाड़ा किला, शायरों ने देर रात तक पढ़ा कलाम
  • हदीस–ए–किसा और कुरान की तिलावत से शुरू हुआ जश्ने सब्रो वफा

रामपुर: नवासा–ए–रसूल हजरत इमाम हुसैन और हजरत अब्बास अलमबरदार के यौमे पैदाइश पर जश्न का माहौल रहा। खूबसूरत तरीके से सजे इमामबाड़ा खासबाग में जश्ने सब्रो वफा की शुरआत कुरान पाक की तिलावत के साथ हुई। इसके बाद शायरों ने देर तक अपने कलाम से लोगों को बांधे रखा।

जश्न का आगाज पूर्व मंत्री नवाब काज़िम अली खां उर्फ नवेद मियां ने शमा रौशन करके किया। मौलाना मूसा रज़ा ने कुरान की तिलावत की जबकि हदीस–ए–किसा की तिलावत मौलाना ज़मां बाकरी ने की।

महिफल की निजामत कर रहे अब्बास हैदर सहरी (एहतेशाम सहरी) ने सज्जाद हल्लौरी को दावते सुखन दी। उन्होंने शेर पढ़ा, एक इन्किलाबे खुमैनी से हो गए हैरान, अरे अभी तो ज़हूर ए इमाम बाकी है।

वारिस जलालपुरी ने अपने कलाम में कहा… आये हो तीरो रोकने सजदा हुसैन का, लो अब तुम्हीं बनोगे मुसल्ला हुसैन का। डॉ. मुहिब रजा मौरानवी ने कहा कि रख दी हमने एक रोटी ताज़िये के साये मे, अब कहां मुमकिन हमारे घर को बरकत छोड़ दे। निज़ामत कर रहे अब्बास हैदर सहरी ने कहा… दम से तुम्हारे साहिबे ईमान हैं हुसैन, दुनिया में आज जितने मुसलमान हैं हुसैन।

उतरौला से तशरीफ लाए दो भाई अली हसन व जफर ने कहा… नसल वीरान है आ कर उसे आबाद करे, कोई रहिब को बताओ के हुसैन आये हैं। साहिल मौरानवी ने कहा… जश्ने सरवर मे वो आते भी तो कैसे आते, उनसे आया ना गया हमसे बुलाया ना गया। इनके अलावा हसन मेहंदी, मोहम्मद हैदर सहरी, मुंतज़िर सल्लमहू, ज़ैन जैदी, यूसूफ रिजवी, अरीब नियाज़ी, बाबर ज़ैदी व सैयद अरहम मेहदी ने कलाम पेश किए। देर रात तक हुई महफिल में शायरों ने अपने कलाम पर खून वाह-वाही पाई। महफिल के महमान–ए–खुसूसी इमामे जुमा मौलाना सैयद अली मोहम्मद नकवी रहे।

इस मौके पर महफिल के संयोजक तस्लीम सहरी, मिर्जा मुज्तबा अली बेग, काशिफ खान, राजा खान, तनवीरुल हैदर, तकी अब्बास, मंसूर हुसैन, असलम महमूद, अकबर रिजवी, फैसल रिज़वी, सईद, ताबिश नकवी, इमरान, प्रिंस जैदी,अली हैदर जैदी, शान जैदी समेत काफी तादाद में लोग मौजूद रहे।

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