मुख्य बिंदु:
- दिल्ली के हरियाणा भवन में ‘मुस्लिम इंटेलेक्चुअल कॉन्फ्रेंस’ का सफल आयोजन।
- देश-विदेश के शिक्षाविदों, कानूनी विशेषज्ञों और धार्मिक नेताओं ने लिया हिस्सा।
- आरएसएस (RSS) के वरिष्ठ प्रचारक डॉ. इंद्रेश कुमार ने कहा- “हर भारतीय की विरासत और जिम्मेदारी एक।
- “डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के आदर्शों पर चलकर देश बनाने का संकल्प।
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के हरियाणा भवन में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर केंद्रित एक भव्य मुस्लिम इंटेलेक्चुअल कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। “एक कौम, एक वतन – हिंदुस्तान” के सशक्त विज़न के साथ आयोजित इस सम्मेलन में देश-विदेश के जाने-माने स्कॉलर्स, शिक्षाविदों, धार्मिक गुरुओं, कानूनी विशेषज्ञों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, नीति निर्माताओं और युवा प्रतिनिधियों ने एक मंच पर आकर नए भारत के भविष्य की रूपरेखा पर मंथन किया।
साझा विरासत और संवैधानिक मूल्यों पर ज़ोर
इस कॉन्फ्रेंस का मुख्य उद्देश्य एक ऐसी साझा राष्ट्रीय पहचान को बढ़ावा देना था, जो नागरिकता, संवैधानिक मूल्यों, आपसी सामाजिक सौहार्द और राष्ट्र निर्माण के संकल्प पर टिकी हो। सम्मेलन से यह साफ संदेश निकला कि भारत की विविधता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है और एकजुट होकर ही देश को विकास के पथ पर आगे ले जाया जा सकता है।
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के दिखाए रास्ते पर चलें युवा: डॉ. इंद्रेश कुमार
सम्मेलन को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ प्रचारक डॉ. इंद्रेश कुमार ने राष्ट्रभक्ति और एकजुटता पर विशेष बल दिया।
उन्होंने कहा,”हर भारतीय की विरासत, उसकी किस्मत और इस मुल्क के प्रति जिम्मेदारी एक जैसी है। हम सबको मिलकर देश को मजबूत बनाना होगा।”
युवाओं को प्रेरित करते हुए डॉ. इंद्रेश कुमार ने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के जीवन और उनके जीवन मूल्यों का उदाहरण दिया। उन्होंने समाज और विशेषकर युवा पीढ़ी से अपील की कि वे डॉ. कलाम जैसे व्यक्तित्व को अपना रोल मॉडल बनाएं, जिनके भीतर ज्ञान, अटूट देशभक्ति, नवाचार (इन्नोवेशन), सेवा भाव और सच्ची इंसानियत का बेजोड़ संगम था।
शिक्षा और बौद्धिक विकास ही तरक्की का आधार: प्रो. शाहिद अख्तर
इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थान आयोग (NCMEI) के सदस्य प्रोफेसर शाहिद अख्तर ने समाज के बौद्धिक और शैक्षिक विकास पर अपनी बात रखी। उन्होंने ज़ोर देते हुए कहा कि कौम की असली तरक्की आधुनिक शिक्षा, कानूनी जागरूकता और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी से ही संभव है। प्रो. अख्तर ने युवाओं से अपील की कि वे मुख्यधारा की शिक्षा से जुड़कर देश के विकास में अपना तकनीकी और बौद्धिक योगदान दें।

भविष्य के भारत का संकल्प
इस एक दिवसीय कॉन्फ़्रेंस में शामिल विशेषज्ञों ने माना कि आज का युवा भारत को वैश्विक पटल पर एक नई ऊंचाई पर देखना चाहता है। इसके लिए शिक्षा, कानूनी जागरूकता और सामाजिक भागीदारी को बढ़ाना बेहद ज़रूरी है। कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिनिधियों ने “एक कौम, एक वतन” के संकल्प को दोहराते हुए देश की संप्रभुता और एकता के लिए काम करने की प्रतिबद्धता जताई।
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